राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज फहरते ही पाकिस्तान बौखलाया, भारत पर लगाए बेबुनियाद आरोप

अयोध्या राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज की स्थापना के बाद पाकिस्तान बौखला गया है। अपने यहां अल्पसंख्यकों पर अत्याचार पर चुप रहने वाला पाकिस्तान भारत पर मुस्लिम सांस्कृतिक विरासत मिटाने के बेबुनियाद आरोप लगा रहा है। जानिए पूरा मामला।

राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज फहरते ही पाकिस्तान बौखलाया, भारत पर लगाए बेबुनियाद आरोप

अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज की स्थापना को लेकर पाकिस्तान अचानक बेचैन हो उठा है। अपने ही देश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, जबरन धर्मांतरण, बलात्कार और मंदिरों की तोड़फोड़ पर मौन साध लेने वाला पाकिस्तान भारत को ही नसीहत देने लगा है। उसके विदेश मंत्रालय ने इस धार्मिक आयोजन को भारत की मुस्लिम सांस्कृतिक धरोहर के लिए खतरा बताते हुए एक बार फिर वही घिसा-पिटा प्रोपगैंडा दोहराया है।

पाकिस्तान का प्रोपगैंडा शुरू
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर दावा किया कि राम मंदिर पर ध्वजारोहण भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर दबाव का हिस्सा है और हिंदुत्व की सोच के तहत मुस्लिम सांस्कृतिक विरासत को खत्म करने की कोशिश हो रही है। पाकिस्तान ने हमेशा की तरह बिना तथ्यों के, भावनात्मक और राजनीतिक आरोपों की झड़ी लगा दी।

बाबरी मस्जिद का मुद्दा उछाल कर भारत को बदनाम करने की कोशिश
भारत के सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले को नजरअंदाज करते हुए पाकिस्तान ने कहा कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद की जगह राम मंदिर और उस पर ध्वज की स्थापना चिंता का विषय है। पाकिस्तान ने 6 दिसंबर 1992 की घटना का हवाला देते हुए भारत को कटघरे में खड़ा करने की असफल कोशिश की।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को अनदेखा किया गया
पाकिस्तान ने यह कहना उचित नहीं समझा कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय दशकों तक चली सुनवाई और ठोस सबूतों के आधार पर राम जन्मभूमि का फैसला सुनाया था। लेकिन उसके बयान में तथ्यों की जगह सिर्फ झूठ दोहराया गया।

पाकिस्तान भूल गया—अपने देश में हिन्दू धरोहरों की हालत
भारत पर आरोप लगाने वाले पाकिस्तान को यह याद नहीं रहा कि उसके यहां मौजूद हजारों साल पुरानी हिन्दू धरोहरें जर्जर हालत में हैं। शारदा पीठ मंदिर, कराची का 150 साल पुराना जागनाथ मंदिर और रावलपिंडी का मोहन मंदिर आज भी दुर्दशा में पड़े हैं, कई धार्मिक स्थलों पर कब्जे हैं और प्रशासन की सरपरस्ती में लगातार तोड़फोड़ होती रही है।

अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न पर चुप क्यों है पाकिस्तान?
हिन्दू, सिख और ईसाई समुदाय के खिलाफ हिंसा, जबरन निकाह, अपहरण और हत्या जैसे मामलों का लंबा इतिहास पाकिस्तान की किताबों में दर्ज है, लेकिन फिर भी पाकिस्तान भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने पर सवाल खड़े करता है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झूठ का ठेला लगाने की कोशिश
पाकिस्तान ने बयान में इतना तक कह दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत में बढ़ते इस्लामोफोबिया और हेट स्पीच पर ध्यान दे। उसने यूएन और अन्य वैश्विक संस्थाओं से ‘मुस्लिम विरासत की रक्षा’ की गुहार लगाई।

छवि सुधारने की नाकाम कोशिश
पाकिस्तान की इस अपील के पीछे उसका वर्षों पुराना मकसद साफ दिखता है—अपने देश में मानवाधिकार हनन से ध्यान भटकाना और भारत की छवि धूमिल करना। लेकिन सच यह है कि भारत सभी धर्मों की आस्था और विरासत का सम्मान करने वाला देश है।