ट्रंप ने क्यों ठुकराया ईरान का शांति प्रस्ताव? परमाणु जिद पर फंसी अमेरिका-ईरान बातचीत
ईरान और अमेरिका के बीच फिलहाल युद्ध नहीं हो रहा, लेकिन तनाव लगातार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत रुकी हुई है। ईरान ने तीन चरणों वाला नया शांति प्रस्ताव दिया, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने उसे खारिज कर दिया। सबसे बड़ा विवाद परमाणु कार्यक्रम और संवर्धित यूरेनियम को लेकर है।
ईरान और अमेरिका के बीच फिलहाल सीधी सैन्य भिड़ंत नहीं हो रही है, लेकिन दोनों देशों के रिश्तों में तनाव कम नहीं हुआ है। हालात ऐसे हैं कि एक दिन समझौते की उम्मीद बनती है, तो अगले ही दिन युद्ध की आशंका फिर तेज हो जाती है। दोनों तरफ से लगातार तीखे बयान दिए जा रहे हैं।
बातचीत अब भी अटकी
दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत फिलहाल ठप पड़ी हुई है। कई दूसरे देश मध्यस्थता कर समझौता कराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी है।
परमाणु मुद्दे पर सबसे बड़ा विवाद
बताया जा रहा है कि बातचीत में सबसे बड़ी रुकावट ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका चाहता है कि ईरान संवर्धित यूरेनियम सौंपे और अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाए, लेकिन ईरान इसके लिए तैयार नहीं दिख रहा है।
तीन चरण वाला प्रस्ताव
तनाव कम करने के लिए ईरान ने तीन चरणों वाला नया प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव पर व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ बैठक की। चर्चा के बाद ट्रंप ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
नाकाबंदी हटाने की मांग
ईरान की पहली शर्त थी कि अमेरिका उस पर लगी आर्थिक और व्यापारिक नाकाबंदी खत्म करे। ईरान का कहना था कि इसके बाद ही आगे की बातचीत संभव है। साथ ही उसने स्थायी रूप से युद्ध खत्म करने की बात भी रखी।
होर्मुज जलडमरूमध्य का भी मुद्दा
ईरान ने यह संकेत भी दिया कि अगर अमेरिका नाकाबंदी हटाता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य को पहले की तरह सामान्य रूप से खोला जा सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।
ट्रंप ने क्यों किया इंकार
सूत्रों के मुताबिक ट्रंप को ईरान की मंशा पर भरोसा नहीं है। उनका मानना है कि ईरान समय लेने की रणनीति अपना रहा है। अमेरिका के लिए परमाणु कार्यक्रम सबसे बड़ी रेडलाइन बना हुआ है, जबकि ईरान बातचीत के दौरान इस मुद्दे को शामिल नहीं करना चाहता।
आगे क्या हो सकता है
जब तक परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम पर सहमति नहीं बनती, तब तक दोनों देशों के बीच तनाव खत्म होना मुश्किल माना जा रहा है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीति सफल होगी या फिर हालात दोबारा बिगड़ेंगे।


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