दिल्ली सदन में ‘बेटियों’ पर बयान से बवाल, सियासत गरमाई

दिल्ली विधानसभा में छात्राओं पर कथित बयान को लेकर जोरदार हंगामा, बेटियों के सम्मान पर सियासत तेज। बजट में साइकिल और लैपटॉप योजना की भी चर्चा।

दिल्ली सदन में ‘बेटियों’ पर बयान से बवाल, सियासत गरमाई

दिल्ली विधानसभा के हालिया सत्र में उस समय माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया जब स्कूली छात्राओं को लेकर आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं की कथित टिप्पणी पर तीखा विरोध सामने आया। इस मुद्दे को लेकर सदन में जोरदार हंगामा हुआ और कई विधायकों ने इसे बेटियों की गरिमा से जुड़ा गंभीर विषय बताया। विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए इसे गंभीरता से लिया।

बजट में बेटियों के लिए बड़े ऐलान
इसी बीच दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा पेश किए गए बजट 2026–27 में बेटियों के सशक्तिकरण को लेकर कई अहम घोषणाएं भी चर्चा में रहीं। उन्होंने कहा कि सरकार 9वीं कक्षा की छात्राओं को साइकिल देगी, ताकि उन्हें स्कूल जाने में सहूलियत मिले। साथ ही 10वीं में बेहतर प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को लैपटॉप देने का भी प्रावधान किया गया है। शिक्षा के लिए ₹19,000 करोड़ का बजट तय करते हुए उन्होंने बेटियों के उज्ज्वल भविष्य को प्राथमिकता बताया।

बयान पर सियासी टकराव तेज
इन घोषणाओं के बीच आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज की कथित टिप्पणी पर विवाद और गहराता गया। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली और कई विधायकों ने इस बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उनका कहना था कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन बेटियों के सम्मान को लेकर कोई भी टिप्पणी स्वीकार्य नहीं हो सकती।

भाजपा ने बयान को बताया अपमानजनक
भारतीय जनता पार्टी के विधायक सतीश उपाध्याय ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह केवल एक बयान नहीं, बल्कि महिलाओं और बेटियों के प्रति सोच को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्राओं को लेकर की गई टिप्पणी निंदनीय है और यह सीधे तौर पर देश की बेटियों का अपमान है। उन्होंने यह भी कहा कि एक ओर सरकार योजनाओं के जरिए बेटियों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसी टिप्पणियां उन प्रयासों को कमजोर करती हैं।

महिला विधायक ने जताई कड़ी आपत्ति
वहीं भाजपा की विधायक शिखा रॉय ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां न केवल छात्राओं के सम्मान को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि उनके भविष्य को लेकर गलत संदेश भी देती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सोच समाज के लिए चिंताजनक है और महिलाओं को केवल एक साधन के रूप में देखना पूरी तरह गलत है।

बेटियों के सम्मान पर सख्त रुख
सदन में इस पूरे मामले को लेकर गहरी नाराजगी देखी गई और इसे “देश की बेटियों के सम्मान” से जुड़ा मुद्दा बताया गया। विधायकों ने साफ कहा कि महिलाओं के सम्मान से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इस पर सख्त रुख अपनाया जाएगा।