जब सिंदूर ही उजड़ गया, तो ऑपरेशन का नाम सिंदूर क्यों? राज्यसभा में जया बच्चन का भावुक बयान
राज्यसभा में जया बच्चन ने 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम पर सवाल उठाए और पहलगाम हमले पर सरकार से माफी की मांग की। पढ़िए उनका पूरा भावुक बयान।
राज्यसभा में उस वक्त माहौल भावुक हो गया, जब समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने पहलगाम आतंकी हमले और उस पर की गई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की कार्रवाई को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे।
जया बच्चन ने कहा कि मैं सबसे पहले उन 26 लोगों को श्रद्धांजलि देना चाहती हूं, जिन्होंने इस हमले में जान गंवाई। ये केवल संख्या नहीं है, हर एक के पीछे एक परिवार उजड़ गया है। आतंकियों ने जिस क्रूरता से हमला किया, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है।
जब सिंदूर उजड़ गया तो नाम सिंदूर क्यों?
जया बच्चन ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम पर आपत्ति जताते हुए कहा, जब सिंदूर ही उजड़ गया, फिर ऑपरेशन का नाम ‘सिंदूर’ क्यों रखा गया? क्या इस नाम में कोई संवेदना झलकती है या यह सिर्फ शब्दों की बाजीगरी है?
'370 हटाने के बाद विश्वास के साथ लोग गए थे'
जया बच्चन ने सरकार पर भरोसा तोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा, जिस आत्मविश्वास के साथ लोग धारा 370 हटने के बाद कश्मीर गए थे, वही विश्वास इस हमले में चकनाचूर हो गया। कश्मीर को 'जन्नत' कहा जाता है, लेकिन अब वहां से लाशें लौट रही हैं।
'गोला-बारूद से नहीं, इंसानियत से होता है देश मजबूत'
रक्षा मंत्री के बयान पर कटाक्ष करते हुए जया बच्चन ने कहा, आपने तोप खरीदी, गोला-बारूद खरीदा, लेकिन क्या उन 26 लोगों की जान बचा सके? ये गोला-बारूद नहीं, इंसानियत होनी चाहिए। शब्दों से नहीं, संवेदना से देश चलता है।
'परिवारों से मांगे माफी, यही है असली राष्ट्रधर्म'
जया बच्चन ने कहा कि सरकार को इस हमले में मारे गए लोगों के परिजनों से माफी मांगनी चाहिए। आपको ‘सॉरी’ बोलना चाहिए। ये हमारी ड्यूटी है। वे परिवार कभी माफ नहीं कर पाएंगे।
'आपको लोगों ने उम्मीदों के साथ भेजा है'
बयान के अंत में उन्होंने संसद सदस्यों से अपील की, प्लीज, विनम्र बनिए। ये कुर्सियां स्थायी नहीं हैं। जनता ने आपको उम्मीद और भरोसे के साथ यहां भेजा है, उसकी कद्र कीजिए।


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