PM योगी? BJP सांसद निशिकांत दुबे बोले - 'दिल्ली की कुर्सी खाली नहीं है'; सोशल मीडिया पर मचा बवाल
BJP सांसद निशिकांत दुबे बोले – योगी आदित्यनाथ प्रधानमंत्री पद के दावेदार नहीं, दिल्ली की कुर्सी खाली नहीं है। सोशल मीडिया पर मचा बवाल।
जब से योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं, उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। बीजेपी के एक वर्ग में और सोशल मीडिया पर उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाने लगा है। हाल ही में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एक सख्त बयान दिया, जिससे राजनीति के गलियारों में हलचल मच गई है।
एक इंटरव्यू में जब उनसे योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने दो टूक कहा, योगी जी आज मुख्यमंत्री हैं और दिल्ली की कुर्सी खाली नहीं है।
निशिकांत दुबे का यह बयान सीधे तौर पर उन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश है, जिसमें योगी को PM पद के लिए प्रोजेक्ट किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि 20-25 साल की राजनीति में क्या होगा, ये अभी किसी को नहीं पता। ऐसे सवाल न पार्टी में उठने चाहिए और न ही दिमाग में।
'पसंद तो बहुत लोग हैं… – दुबे का तंज
जब इंटरव्यू में उनसे कहा गया कि लोग योगी को पसंद करते हैं, तो निशिकांत दुबे ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा, पसंद तो कई लोग आ रहे हैं। हिमंता बिस्वा सरमा, देवेंद्र फडणवीस और माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी भी बहुत पसंद किए जाते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि PM पद की रेस में सब शामिल हैं।
निशिकांत दुबे ने साफ किया कि आज भी जनता मोदी जी के नाम पर वोट करती है, और 2017 में योगी के मुख्यमंत्री बनने के समय भी लोगों ने मोदी के नाम पर ही भाजपा को जिताया था।
'भाजपा की ताकत का असली श्रेय…'
उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा आज जिस मुकाम पर है, उसका पूरा श्रेय प्रधानमंत्री मोदी और उस वक्त के पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को जाता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी की ऐतिहासिक जीत का क्रेडिट अमित शाह को जाता है। पार्टी में टैलेंट की कोई कमी नहीं है।
सोशल मीडिया पर विरोध शुरू
निशिकांत दुबे के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। रंजन राय नाम के यूज़र ने लिखा, इसीलिए भाजपा यूपी में लोकसभा चुनाव बुरी तरह हारी। योगी जी अपने हिसाब से कैंडिडेट सुझा रहे थे, लेकिन बाकी लोग अपनी चाल चल रहे थे। दुबे जी झारखंड और बिहार देखिए, यूपी में दिमाग न लगाइए।
इस तरह के कमेंट यह संकेत देते हैं कि पार्टी के अंदर और बाहर, योगी बनाम शेष नेतृत्व को लेकर एक मनोवैज्ञानिक संघर्ष जारी है।


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