बिहार की नदियों में जमा गाद अब बनेगी वरदान, पटना एनआइटी में शोध से पता चली एक खास बात
बिहार की अधिसंख्य नदियों में गाद सबसे बड़ी समस्या है। गाद की अधिकता के कारण हर साल नदियां उथली हो रही हैं, जिसका प्रभाव बाढ़ के नए क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी), पटना का सिविल डिपार्टमेंट में नदी की गाद के बेहतर उपयोग के लिए शोध किया है, जो अब अंतिम चरण में हैं। नदी की गाद में और कुछ चीजें मिलाकर उससे बोल्डर (सड़क निर्माण के दौरान इस्तेमाल किया जाना वाले बड़े आर के पत्थर के टुकड़े ) बनाया जा रहा। इन पत्थरों के ऊपर के और लेयर देने के लिए भी इसके मिश्रण का उपयोग होगा।दो चरणों के परीक्षण में परिणाम उत्साहवर्धक मिले हैं। ग्रामीण व कम भार वहन करने वाली सड़कों पर यह प्रयोग सफल साबित हुआ है। अब स्टेट हाईवे और अधिकत्तम भार वहन करने वाली सड़कों के लिए परीक्षण किया जा रहा है। एनआइटी पटना के डीन सह सिविल विभाग के प्रो. संजीव सिन्हा ने बताया कि राज्य में पत्थर की उपलब्धता काफी कम है। सड़क निर्माण में कम से पत्थर के उपयोग तथा स्थानीय संसाधन का अधिक से अधिक सदुपयोग कर गुणवत्ता के साथ लागत को कम करने पर कार्य किया जा रहा है।







