उत्तर प्रदेश विधानसभा में CM योगी का तंज, बिस्मिल-बिस्मिल्लाह खान प्रसंग पर गूंजे ठहाके
उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा सरकार पर तंज कसते हुए राम प्रसाद बिस्मिल और बिस्मिल्लाह खान से जुड़ा पुराना प्रसंग सुनाया। बयान के बाद सदन में ठहाके गूंज उठे। पढ़ें पूरी राजनीतिक खबर।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को चर्चा के दौरान उस समय माहौल अचानक हल्का हो गया, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी की पूर्व सरकार पर कटाक्ष करते हुए एक पुराना प्रसंग साझा किया। उनके बयान पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के बीच भी सदन ठहाकों से गूंज उठा और कुछ देर के लिए वातावरण राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से हटकर व्यंग्यपूर्ण हो गया।
शहादत दिवस के कार्यक्रम का जिक्र, मंत्री के बयान पर चुटकी
मुख्यमंत्री ने बताया कि सपा सरकार के कार्यकाल में क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के शहादत दिवस पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें शिक्षा विभाग के एक मंत्री को मुख्य अतिथि बनाया गया। योगी के मुताबिक जब मंत्री को कार्यक्रम के विषय की जानकारी दी गई तो उन्होंने भ्रमवश इसे भारत रत्न से सम्मानित शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ से जोड़ दिया और कथित तौर पर सवाल कर बैठे कि उन्हें फांसी क्यों दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंच पर पहुंचने के बाद भी मंत्री ने यही बात दोहराई और जब उपस्थित लोगों ने सुधारने की कोशिश की तो उन्हें राजनीतिक रंग दे दिया गया।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, ‘अंधेर नगरी’ वाला तंज
इस प्रसंग को आधार बनाते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब शिक्षा विभाग के जिम्मेदार पद पर बैठे लोगों को ही ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का अंतर न मालूम हो तो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने तंज कसते हुए ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ जैसी स्थिति का जिक्र किया और आरोप लगाया कि उसी दौर में नकल माफिया को बढ़ावा मिला। मुख्यमंत्री के इन शब्दों पर सदन में जोरदार ठहाके सुनाई दिए और बहस का स्वर कुछ देर के लिए हल्का हो गया।
गोरखपुर का अनुभव, मंत्री को पहचान न पाए अधिकारी
मुख्यमंत्री ने एक और घटना साझा करते हुए कहा कि जब वे गोरखपुर से सांसद थे, तब एक रेलवे स्टेशन पर राज्य सरकार के कुछ अधिकारी मौजूद थे। उसी दौरान माध्यमिक शिक्षा मंत्री भी वहां पहुंचे, लेकिन एक अधिकारी उन्हें पहचान नहीं सका। योगी के अनुसार जब उन्होंने अधिकारी से पूछा तो उसने उल्टा सवाल किया कि कौन मंत्री। बाद में मंत्री ने स्वयं स्वीकार किया कि वे कई महीनों से सचिवालय नहीं गए थे, इसलिए अधिकारी उन्हें पहचान नहीं पाया। मुख्यमंत्री ने इसे विभागीय गंभीरता में कमी का उदाहरण बताया।


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