बरेली में बवाल पर नया खुलासा: मौलाना तौकीर रजा की राजनीति या भड़काऊ इरादे?
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मौलाना तौकीर रजा और IMC के पूर्व जिलाध्यक्ष नदीम खां की गिरफ्तारी के बाद उपद्रव की पूरी सच्चाई सामने आई। पढ़ें गुटबंदी, फर्जी दस्तावेज़ और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का पूरा खुलासा।
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में हाल ही में हुए बवाल की तह तक पहुंचते हुए पुलिस ने इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उनके बेहद करीबी और IMC के पूर्व जिलाध्यक्ष नदीम खां भी पुलिस की गिरफ्त में हैं। पूछताछ के दौरान नदीम ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिनसे इस बवाल की राजनीतिक और सामाजिक गहराई सामने आई है।
तौकीर रजा की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ
नदीम खां ने पुलिस को बताया कि मौलाना तौकीर रजा डेढ़ साल से बरेली में बड़ी भीड़ नहीं जुटा पाए थे। इस असफलता से परेशान होकर उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुस्लिम समुदाय में अपनी पकड़ मजबूत करने की योजना बनाई। नदीम के अनुसार, तौकीर रजा धार्मिक मुद्दों का इस्तेमाल कर खुद को मुस्लिम समाज का प्रमुख नेता साबित करना चाहते थे।
मौलाना की योजना सिर्फ धार्मिक संदेश तक सीमित नहीं थी। उनका उद्देश्य आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस, सपा और बसपा जैसे बड़े दलों को दिखाना था कि वे मुस्लिम वोट बैंक को अपने इशारे पर खड़ा कर सकते हैं।
गुटबंदी और फर्जी दस्तावेज़ का खुलासा
पूछताछ में नदीम ने बताया कि प्रदर्शन वाले दिन प्रशासन को गुमराह करने के लिए एक पत्र तैयार किया गया था, जिस पर IMC के प्रदेश मीडिया प्रभारी लियाकत खां के फर्जी हस्ताक्षर कराए गए थे। इसमें नफीस और एक तीसरे व्यक्ति ने भी मदद की थी। इस पत्र को पुलिस को सौंपा गया।
एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा कि रात में पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से नदीम और नफीस ने फोन पर बातचीत की। इसके बाद ही कार्यक्रम स्थगित करने का आश्वासन दिया गया, लेकिन जब यह पत्र पार्टी के ग्रुप में गया तो मौलाना तौकीर ने इसे फर्जी घोषित कर दिया और वीडियो जारी कर विवाद को और बढ़ा दिया।
संगठन के अंदर दो गुट और बवाल की वजह
नदीम ने बताया कि संगठन के भीतर दो गुट थे— नदीम खां और नफीस मुनीर इदरीशी, अनीस सकलैनी और अहसानुल हक उर्फ़ चतुर्वेदी। गुटों के बीच पुरानी खींचतान बवाल की मुख्य वजह बनी। नदीम ने अपनी भूमिका को कम बताते हुए कहा कि भीड़ जुटाने का मुख्य काम मुनीर और नफीस ने किया। वह खुद लोगों को शांत करने और प्रशासन की अनुमति के अनुसार आंदोलन को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे।
पुलिस का मानना है कि नदीम भी पूरे घटनाक्रम का अहम हिस्सा था। बवाल के बाद वह शाहजहांपुर के कटरा इलाके में अपने मामा के घर छिप गया था। बाद में पकड़े जाने पर उसने कई नई कड़ियां पुलिस को दीं, जो जांच में अहम साबित हुई हैं।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा कि नदीम से मिली जानकारी आगे की जांच और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी में सहायक होगी। अगर मौलाना की योजना कामयाब हो जाती, तो 9 फरवरी 2024 जैसी भड़काऊ तकरीर से हालात फिर बिगड़ सकते थे।
पूरी जांच यह साफ कर रही है कि मौलाना तौकीर रजा का मकसद सिर्फ धार्मिक भीड़ जुटाना नहीं था। लंबे समय से बड़ी भीड़ न जुटा पाने से उनकी राजनीतिक पकड़ कमजोर हो रही थी। यही वजह रही कि उन्होंने बरेली से एक बड़ा संदेश देने और खुद को मुस्लिम समाज का प्रभावशाली नेता साबित करने की कोशिश की।


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