बिहार की राजनीति में नई इनिंग! नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार पर टिकी नजरें, जेडीयू में एंट्री लगभग तय

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जेडीयू की बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की एंट्री लगभग तय मानी जा रही है। पार्टी के भीतर बदलाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं और सदस्यता अभियान में भी निशांत की भूमिका बढ़ी है। जानिए पूरी कहानी विस्तार से।

बिहार की राजनीति में नई इनिंग!  नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार पर टिकी नजरें, जेडीयू में एंट्री लगभग तय
Nishant Kumar

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने पूरे राजनीतिक परिदृश्य को हिला दिया। 43 सीटों से सीधा 85 पर पहुंचकर पार्टी ने न सिर्फ मजबूती दिखाई, बल्कि सत्ता की नई दिशा भी तय कर दी। इस बड़ी जीत के बीच अब चर्चा का केंद्र बने हैं नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार, जिनकी जेडीयू में एंट्री लगभग पक्की मानी जा रही है।

कार्यकर्ताओं की पुरानी मांग—निशांत को मिले पार्टी की जिम्मेदारी
चुनाव से पहले ही कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए पोस्टरों में निशांत को सक्रिय राजनीति में लाने की मांग उठने लगी थी। कई बार पार्टी नेता और कार्यकर्ता खुले तौर पर कह चुके थे कि नीतीश कुमार की बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य स्थितियों को देखते हुए अब पार्टी को एक नए नेतृत्व की जरूरत है, और इसके लिए निशांत से बेहतर विकल्प कोई नहीं। अब चुनाव परिणामों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि पार्टी की कमान जल्द ही उनके हाथों में सौंपी जा सकती है।

पार्टी के भीतर स्पष्ट राय—निशांत ही संभाल सकते हैं मुख्य वोट बैंक
जेडीयू के एक वरिष्ठ और नीतीश के बेहद करीबी नेता का कहना है कि पार्टी का मुख्य वोट बैंक पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व में उस व्यक्ति का होना अत्यंत जरूरी है जो इस सामाजिक आधार को जोड़कर रख सके। उनके अनुसार, यह भूमिका निशांत कुमार बखूबी निभा सकते हैं। चुनाव खत्म होने के बाद पार्टी के अंदरूनी हलकों में भी निशांत को आगे लाने की व्यूह-रचना शुरू हो गई है। बताया जाता है कि स्वयं निशांत भी चाह रहे हैं कि वह अब बिहार की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएं।

'क्षेत्रीय राजनीति में परिवार ही बनता है उत्तराधिकारी'
बिहार की राजनीति को करीब से समझने वाले विश्लेषक धीरेंद्र कुमार का कहना है कि नीतीश कुमार अब अपने राजनीतिक करियर के अंतिम दौर में हैं। ऐसे समय में पार्टी को स्थिरता देने के लिए एक मजबूत उत्तराधिकारी का होना जरूरी है। उनका कहना है कि भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों के इतिहास को देखा जाए तो अधिकतर पार्टियों की बागडोर परिवार में ही गई है क्योंकि इससे वोट बैंक पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसी वजह से निशांत कुमार पर भरोसा बढ़ता दिखाई दे रहा है।

निशांत की एंट्री से वोट बैंक को मिलेगा स्थिर आधार
उन्होंने आगे कहा कि नीतीश कुमार ने हमेशा पिछड़ा-अतिपिछड़ा वर्ग की राजनीति की है और इस वोट बैंक को एकजुट रखने के लिए जरूरी है कि उनका परिवार सामने आए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार भी इस बात को अच्छी तरह समझ रहे हैं और यही वजह है कि निशांत अब लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं।

सदस्यता अभियान में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे निशांत कुमार
हाल ही में जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने कहा था कि पार्टी चाहती है कि निशांत सक्रिय रूप से संगठन में योगदान दें। वहीं बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने इसे सकारात्मक संकेत बताया और कहा कि यदि निशांत राजनीति में आते हैं तो यह अच्छी बात होगी। इन बयानों के बीच गुरुवार (11 दिसंबर, 2025) को जेडीयू कार्यकर्ताओं ने यह भी खुलासा किया कि चल रहे सदस्यता अभियान में दो करोड़ नए सदस्य जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है और इस पूरे अभियान में निशांत अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

खरमास के बाद हो सकती है निशांत की औपचारिक एंट्री
कार्यकर्ताओं का दावा है कि खरमास खत्म होने के बाद निशांत स्वयं पार्टी की सदस्यता लेंगे, जिसके बाद उनकी औपचारिक एंट्री की घोषणा भी संभव है। जेडीयू की इस बंपर जीत के बाद निशांत की राजनीति में एंट्री अब सिर्फ समय की बात लगती है।