Teachers’ Day 2025: पटना के लोहिया नगर माउंट कार्मेल हाई स्कूल में हुआ भव्य समारोह, प्रिंसिपल और डायरेक्टर ने साझा किए शिक्षा पर विचार
Teachers’ Day 2025 News: पटना के लोहिया नगर माउंट कार्मेल हाई स्कूल (ब्वॉयज विंग) में शिक्षक दिवस पर भव्य समारोह हुआ। प्रिंसिपल शालिनी सिंह और डायरेक्टर मीनू सिंह ने आँखे न्यूज़ 24 से खास बातचीत में शिक्षा, बच्चों और बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर अपने विचार साझा किए।
5 सितंबर को पूरे देश में शिक्षक दिवस (Teachers’ Day) धूमधाम से मनाया गया। यह दिन भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर समर्पित है। राजधानी पटना के लोहिया नगर माउंट कार्मेल हाई स्कूल (ब्वॉयज विंग) में इस अवसर पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
छात्रों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
शुक्रवार को हुए कार्यक्रम में छात्रों ने रंगारंग डांस और गीत प्रस्तुत कर शिक्षकों का सम्मान किया। इस मौके पर स्कूल की प्रिंसिपल शालिनी सिंह और डायरेक्टर मीनू सिंह ने सभी शिक्षकों को शुभकामनाएँ दीं और कहा कि शिक्षक ही बच्चों के भविष्य और समाज की नींव तैयार करते हैं।
विज़न और मिशन में Teachers’ Day का महत्व
इस मौके पर डायरेक्टर मीनू सिंह ने कहा कि Teachers’ Day हमारे स्कूल के मिशन का अहम हिस्सा है। यह हमें याद दिलाता है कि शिक्षक ही राष्ट्र निर्माण की असली नींव हैं और शिक्षा का महत्व हमेशा सर्वोपरि रहेगा।
शिक्षा का असली अर्थ
उनके अनुसार शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जीवन कौशल, आत्मनिर्भरता, संस्कार और जिम्मेदारी भी शिक्षा का हिस्सा होने चाहिए।
संस्कार और अनुशासन की भूमिका
मीनू सिंह का मानना है कि बच्चों को सिर्फ पढ़ाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें संस्कार और अनुशासन देना भी स्कूल की जिम्मेदारी है। इसके लिए स्कूल में सामूहिक कार्यक्रम, गतिविधियाँ और नैतिक शिक्षा पर खास जोर दिया जाता है।
शिक्षकों की ट्रेनिंग और रिसर्च
उन्होंने बताया कि स्कूल समय-समय पर टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम, रिसर्च वर्कशॉप और सेमिनार आयोजित करता है। इससे शिक्षक नए-नए तरीके सीखते हैं और छात्रों को बेहतर शिक्षा दे पाते हैं।
बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर राय
बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर बात करते हुए मीनू सिंह ने कहा कि सबसे जरूरी है कि शिक्षा की गुणवत्ता पर फोकस किया जाए। अच्छे शिक्षक, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ही बिहार को नई दिशा दे सकता है।
प्राइवेट और सरकारी स्कूल का अंतर
उनका कहना है कि प्राइवेट और सरकारी स्कूलों के बीच अंतर को कम करने के लिए शिक्षकों की ट्रेनिंग और क्वालिटी पर काम करना होगा। साथ ही सरकारी स्कूलों में भी स्मार्ट क्लास, आधुनिक लाइब्रेरी और सुविधाएँ उपलब्ध करानी चाहिए।
टीचर्स-स्टूडेंट्स संबंध
मीनू सिंह ने बताया कि डायरेक्शन लेवल पर स्कूल हमेशा कोशिश करता है कि शिक्षक बच्चों के साथ दोस्ताना और सहयोगी माहौल बनाएं। इसके लिए नियमित इंटरैक्शन, काउंसलिंग और ओपन डिस्कशन सेशन आयोजित किए जाते हैं।
प्रिंसिपल शालिनी सिंह कहती हैं कि टीचर्स डे सिर्फ उत्सव नहीं बल्कि सम्मान का दिन है। यह हमें याद दिलाता है कि शिक्षक बच्चों के भविष्य का निर्माण करते हैं और समाज की नींव मजबूत बनाते हैं।
शिक्षक की बदलती भूमिका
उनके अनुसार पहले शिक्षक सिर्फ ज्ञान देने वाले माने जाते थे, लेकिन आज उनका दायरा बढ़ गया है। अब वे गाइड, मेंटर और मोटिवेटर की भूमिका भी निभाते हैं। शिक्षा अब किताबों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर और जिम्मेदार बनाना भी जरूरी है।
एक अच्छे शिक्षक की पहचान
शालिनी सिंह कहती हैं कि एक अच्छे शिक्षक की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह बच्चों को पढ़ाई के साथ जीवन जीने की कला भी सिखाए। धैर्य, ईमानदारी और प्रेरित करने की क्षमता शिक्षक की असली ताकत है।
डिजिटल शिक्षा का प्रभाव
उनका मानना है कि स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल टूल्स ने बच्चों की पढ़ाई को रोचक और आसान बना दिया है। अब बच्चे सुनकर ही नहीं, बल्कि देखकर और अनुभव करके ज्यादा सीखते हैं। इससे उनकी समझ और आत्मविश्वास दोनों में वृद्धि हुई है।
शिक्षकों को मोटिवेटेड रखना
उन्होंने बताया कि शिक्षकों को मोटिवेटेड और अपडेटेड रखने के लिए स्कूल में समय-समय पर वर्कशॉप और ट्रेनिंग आयोजित की जाती हैं। साथ ही उन्हें नई तकनीक और पढ़ाने की विधियों से जोड़ा जाता है।
पैरेंट्स और बच्चों की बदलती अपेक्षाएँ
शालिनी सिंह ने स्वीकार किया कि आज पैरेंट्स और बच्चों की अपेक्षाएँ बदल गई हैं। अब पढ़ाई के साथ-साथ पर्सनालिटी डेवलपमेंट और एक्स्ट्रा स्किल्स की भी मांग होती है। इसके लिए पैरेंट्स और टीचर्स के बीच संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी है।


आँखें न्यूज़ 24 




