बिहार चुनाव 2025: मुस्लिम वोटर बना ‘किंगमेकर’, पर कुर्सी से दूर! तेजस्वी-चिराग के बयान से गरमाई सियासत
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मुसलमानों को लेकर महागठबंधन और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज़ हो गई है। तेजस्वी यादव ने चिराग पासवान के आरोपों का जवाब देते हुए कहा—“हम मुसलमानों की चिंता दूर करेंगे।” पढ़िए बिहार की मुस्लिम राजनीति का पूरा विश्लेषण।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का तापमान अब हर दिन बढ़ता जा रहा है। खासकर तब, जब महागठबंधन ने अपने दोनों बड़े चेहरे घोषित कर दिए—मुख्यमंत्री पद के लिए तेजस्वी यादव और उपमुख्यमंत्री पद के लिए वीआईपी पार्टी प्रमुख मुकेश साहनी। लेकिन इसी घोषणा के बाद विपक्ष के साथ-साथ सहयोगी दलों के भीतर से भी यह सवाल उठने लगे हैं कि “बिहार में मुसलमान सिर्फ वोट बैंक हैं या सत्ता के असली हिस्सेदार भी?
चिराग पासवान का आरोप: मुसलमानों को सिर्फ वोट समझती है RJD
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने महागठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, आरजेडी 2005 में भी मुस्लिम मुख्यमंत्री देने के लिए तैयार नहीं थी, और 2025 में भी नहीं है। आज भी न सीएम और न ही डिप्टी सीएम पद मुसलमानों को मिला। उनके इस बयान ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व की बहस को हवा दे दी।
तेजस्वी यादव का पलटवार: बीजेपी को मुसलमानों से नहीं, अति पिछड़ों से भी डर
तेजस्वी यादव ने चिराग के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा— जो लोग मुसलमानों को पाकिस्तान भेजने की बात करते हैं, वो आज मुस्लिमों की चिंता जता रहे हैं। बीजेपी खुद अति पिछड़ों से नफरत करती है।
उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमानों की चिंता हमें है, और हम उसे दूर करेंगे। तेजस्वी का यह बयान न सिर्फ बीजेपी बल्कि अपने पुराने सहयोगियों के लिए भी सियासी संदेश की तरह देखा जा रहा है।
महागठबंधन में डिप्टी सीएम की कुर्सी पर मुकेश सहनी
तेजस्वी ने अपने डिप्टी के रूप में वीआईपी पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी को आगे किया है। मुकेश साहनी अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं, जिन्हें राजनीतिक तौर पर निषाद वोट बैंक का प्रतीक माना जाता है।
बीजेपी ने इसी पर सवाल उठाते हुए कहा कि महागठबंधन सिर्फ जातीय समीकरण के आधार पर राजनीति कर रहा है, मुसलमानों को हाशिए पर रख रहा है।
एआईएमआईएम का पलटवार
एआईएमआईएम नेता असीम वकार ने कहा— बिहार में 13 प्रतिशत यादव मुसलमानों (18%) को यह कह रहे हैं कि हमें वोट दो, हम तुम्हें बीजेपी से बचा लेंगे। अब मुसलमान उपमुख्यमंत्री से नीचे कोई समझौता नहीं करेगा।
इस बयान ने मुस्लिम राजनीति को नई दिशा दी है, क्योंकि बिहार की करीब 37 सीटें मुस्लिम बहुल हैं, जो किसी भी गठबंधन के जीत या हार तय करने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।
मुस्लिम वोटर: हर दल के लिए ज़रूरी, पर प्रतिनिधित्व पर सवाल बरकरार
बिहार में मुसलमानों की आबादी लगभग 17-18% है। यह समुदाय न सिर्फ चुनावी परिणामों को प्रभावित करने वाला सामाजिक वर्ग है, बल्कि कई सीटों पर किंगमेकर की भूमिका में भी रहता है।
फिर भी, अब तक किसी भी बड़े गठबंधन ने इस समुदाय को सीएम या डिप्टी सीएम जैसी जिम्मेदारी नहीं दी। यही कारण है कि 2025 के चुनाव में Representation vs Tokenism की बहस अपने चरम पर पहुंच गई है।
बिहार की सियासत में मुसलमान न तो सिर्फ “वोट बैंक” हैं और न ही सिर्फ “सांत्वना भाषण” सुनने वाले। 2025 का चुनाव इस बात की परीक्षा होगी कि क्या कोई दल उन्हें वास्तविक प्रतिनिधित्व देता है या फिर वही पुराने वादे दोहराए जाते हैं।


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