बिहार चुनाव 2025: NDA आत्मविश्वास से लबरेज, INDIA गठबंधन में बढ़ा भ्रम — पहले चरण में 1250 से ज़्यादा उम्मीदवारों ने दाखिल किए पर्चे

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो गई है। जहां NDA आत्मविश्वास से भरा दिखाई दे रहा है, वहीं INDIA गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर भ्रम बना हुआ है। अमित शाह, नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच सियासी जंग तेज हो गई है।

बिहार चुनाव 2025: NDA आत्मविश्वास से लबरेज, INDIA गठबंधन में बढ़ा भ्रम — पहले चरण में 1250 से ज़्यादा उम्मीदवारों ने दाखिल किए पर्चे
Nitish Kumar and Tejashwi Yadav

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुक्रवार को समाप्त हो गई। निर्वाचन आयोग के मुताबिक, पहले चरण के 121 विधानसभा क्षेत्रों में अब तक 1,250 से अधिक उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए हैं, और यह संख्या अभी और बढ़ सकती है क्योंकि कुछ जिलों से अंतिम आंकड़े आना बाकी हैं।

INDIA गठबंधन में तालमेल की कमी, कई सीटों पर दो-दो उम्मीदवार
जहां एक ओर NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) का चुनावी अभियान तेज़ी से रफ्तार पकड़ चुका है, वहीं INDIA गठबंधन (राजद, कांग्रेस, वाम दल और वीआईपी) अभी भी सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन को लेकर असमंजस में फंसा हुआ है।

कम से कम छह सीटों पर INDIA गठबंधन के दो या उससे अधिक उम्मीदवारों ने पर्चा भर दिया है। यदि इन उम्मीदवारों ने 20 अक्टूबर तक नाम वापस नहीं लिया, तो कई जगहों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ (Friendly Fight) देखने को मिल सकती है — यानी एक ही गठबंधन के उम्मीदवार आमने-सामने होंगे।

राजद-कांग्रेस में मतभेद गहराए, सीट बंटवारा बना सिरदर्द
कांग्रेस ने जाले सीट पर राजद नेता ऋषि मिश्रा को अपने चुनाव चिन्ह पर लड़ने की अनुमति दी है। लेकिन लालगंज सीट पर राजद ने उदारता नहीं दिखाई, जहां माफिया नेता मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला और कांग्रेस उम्मीदवार आदित्य कुमार राजा दोनों मैदान में हैं।

इसी तरह वैशाली और कहलगांव में भी कांग्रेस और राजद के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। कांग्रेस को इसके अलावा बछवाड़ा, राजापाकर और रोसेरा में भी भाकपा उम्मीदवारों से मुकाबला करना पड़ सकता है।

वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी की नई राजनीतिक चाल
विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के मुखिया मुकेश सहनी इस बार खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा — मैं राज्यसभा नहीं जाना चाहता, बल्कि चाहता हूं कि INDIA गठबंधन की सरकार बने और मैं उपमुख्यमंत्री बनूं। सहनी की इस टिप्पणी ने गठबंधन के अंदर भविष्य की शक्ति-संतुलन को लेकर चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

तेजस्वी यादव और एनडीए के दिग्गज मैदान में
राजद नेता तेजस्वी यादव एक बार फिर राघोपुर सीट से मैदान में हैं और तीसरी बार जीत का प्रयास कर रहे हैं। वहीं एनडीए की ओर से उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (तरापुर), विजय कुमार सिन्हा (लखीसराय), बीजेपी नेता मंगल पांडे, और जदयू के विजय कुमार चौधरी जैसे बड़े नाम पहले चरण में चुनावी रण में उतर चुके हैं।

अमित शाह का बिहार मिशन — ‘गड्ढा भर दिया, अब इमारत बनाएंगे’
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सारण में रैली कर राजद शासनकाल को गड्ढा बताया और कहा — हमने उस गड्ढे को भर दिया है, अब अगले पांच साल में बिहार में विकास की मजबूत इमारत खड़ी करेंगे।

उन्होंने कांग्रेस-राजद गठबंधन पर अपराधियों और विदेशी घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया और जनता से अपील की कि लालू प्रसाद को फिर वापसी का मौका न दें, जिन्हें 2005 में आपने सत्ता से बाहर किया था।

इसके बाद शाह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर यह संदेश भी दिया कि NDA में सब कुछ ठीक है और सीट बंटवारे को लेकर कोई विवाद नहीं है। उन्होंने कहा — NDA नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहा है, और अगर बीजेपी की सीटें ज्यादा भी हुईं तो इससे फर्क नहीं पड़ेगा।

NDA की एकजुटता बनाम INDIA की उलझन
शाह के बयान से जद(यू) नेताओं में संतोष देखा गया, जबकि राजद-कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या शाह ने नीतीश को दोबारा मुख्यमंत्री बनाए जाने की गारंटी दी है?

उधर बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री — देवेंद्र फडणवीस (महाराष्ट्र), मोहन यादव (मध्य प्रदेश), प्रमोद सावंत (गोवा), पुष्कर सिंह धामी (उत्तराखंड) और मोहन मझी (ओडिशा) — बिहार पहुंच चुके हैं और एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में सभाएं कर रहे हैं।

NDA ने 243 सदस्यीय विधानसभा की 101-101 सीटों पर जद(यू) और बीजेपी के बीच सहमति बनाई है। बाकी सीटें लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को दी गई हैं।

राजनीतिक तस्वीर
बिहार चुनाव के पहले चरण ने यह साफ कर दिया है कि जहां NDA संगठित और आत्मविश्वासी अभियान चला रहा है, वहीं INDIA गठबंधन आंतरिक असंतुलन का शिकार है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विपक्ष 20 अक्टूबर तक अपनी सीटें और उम्मीदवार तय कर पाता है, या बिहार की राजनीति में फिर वही पुराना गठबंधन का घमासान देखने को मिलेगा।