बिहार विधानसभा चुनाव से पहले 64 लाख वोटर लिस्ट से नाम कटेंगे, चुनाव आयोग का बड़ा खुलासा
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान में चौंकाने वाला खुलासा: 64 लाख वोटरों के नाम हटेंगे। जानिए क्यों और कैसे हो रही है मतदाता सूची की सफाई।
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने राज्य में Special Intensive Revision (SIR) अभियान चलाया है, जिसका उद्देश्य है मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाना। हालांकि, इस अभियान को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार और आयोग पर सवाल उठाए हैं, खासकर इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने को लेकर।
64 लाख मतदाताओं के नाम हटेंगे, आंकड़े चौंकाने वाले हैं
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
- कुल 7.89 करोड़ मतदाताओं में से 7.23 करोड़ के फॉर्म मिल चुके हैं (99.86%)
-22 लाख मृतक वोटर्स की पहचान हुई है
-35 लाख लोग स्थायी रूप से स्थानांतरित या लापता हैं
-7 लाख वोटर डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन में पाए गए हैं
-लगभग 1.2 लाख मतदाताओं के फॉर्म अब भी नहीं मिले हैं
किन लोगों ने निभाई अहम भूमिका?
इस अभियान की सफलता में इन लोगों का योगदान रहा:
-मुख्य निर्वाचन अधिकारी, बिहार
-38 जिलों के निर्वाचन अधिकारी
-243 EROs (Electoral Registration Officers)
-2,976 AEROs
-77,895 BLOs (Booth Level Officers)
-1.60 लाख BLA (Booth Level Agents)
-12 प्रमुख राजनीतिक दल और उनके जिला अध्यक्ष
12 प्रमुख दलों को दी गई सूची
चुनाव आयोग ने 20 जुलाई को सभी 12 प्रमुख राजनीतिक दलों को उन मतदाताओं की सूची दी, जिनके नाम हटाए जाने हैं। इसमें RJD, JDU, BJP, Congress, AAP, LJP, RLSP, CPI(M), CPI(ML), NPP, BSP जैसे दल शामिल हैं।
SIR के तहत अगला कदम क्या है?
1 अगस्त से 1 सितंबर के बीच कोई भी नागरिक या दल किसी भी छूटे हुए वोटर को जोड़ने और अयोग्य नाम हटाने के लिए दावा-आपत्ति दर्ज कर सकता है। यह ईआरओ कार्यालय में जाकर किया जा सकता है।


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