महुआ में लालू के लालों की जंग! तेजस्वी के प्रचार के बाद बोले तेज प्रताप – 'छोटे और नादान भाई को याद रहे, जनता ही असली मालिक है'
बिहार चुनाव 2025 में महुआ विधानसभा सीट बनी सियासी सुर्खियों का केंद्र। तेजस्वी यादव के प्रचार के बाद तेज प्रताप यादव ने उन्हें “छोटा और नादान भाई” कहकर निशाना साधा। जानिए लालू परिवार की इस अंदरूनी जंग का पूरा राजनीतिक अर्थ।
बिहार में चुनाव प्रचार अब जोर पकड़ चुका है और पहले चरण के चुनाव की सरगर्मी अपने चरम पर है। इसी बीच रविवार को राज्य की सियासत में एक दिलचस्प मोड़ तब आया, जब पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव महुआ विधानसभा सीट पर चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे — वही सीट, जिसे उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव का पारंपरिक गढ़ माना जाता है।
तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन में साफ कहा कि “पार्टी से बड़ा कोई नहीं होता। पार्टी ही मां-बाप है, और अगर पार्टी नहीं होगी, तो कोई कुछ नहीं है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “महुआ का टिकट लालू यादव ने तय किया है, और यहां लालटेन ही जलेगी तो बिहार में हमारी सरकार बनेगी।”
'छोटे और नादान भाई को समझना चाहिए…'
तेजस्वी के इस बयान के कुछ ही घंटों बाद, तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने छोटे भाई पर तंज कसते हुए लिखा – हमारे छोटे और नादान भाई तेजस्वी ने आज महुआ में कहा कि पार्टी से बड़ा कोई नेता नहीं होता, लेकिन मैं उन्हें यह बताना चाहता हूं कि पार्टी से बड़ी हमारी जनता मालिक होती है। लोकतंत्र में सबसे ऊपर जनता होती है, न कोई पार्टी और न कोई परिवार।
उन्होंने आगे लिखा कि महुआ मेरी राजनीतिक कर्मभूमि है, यह मेरे लिए पार्टी और परिवार दोनों से बढ़कर है। जनता ही हमारी असली मालिक है और वही हमें सत्ता तक पहुंचाती है।
जनता से अपील – 'विकसित महुआ, विजयी महुआ'
तेज प्रताप यादव ने अपने पोस्ट में महुआ की जनता से भावनात्मक अपील करते हुए कहा – महुआ की आदरणीय जनता जनार्दन से मुझे पूरा विश्वास है कि वे मुझे भारी मतों से जिता कर सदन भेजेंगी और महुआ को विकास की राह पर आगे बढ़ाने में सहयोग करेंगी। विजयी महुआ, विकसित महुआ।
लालू परिवार की अंदरूनी सियासत का नया एपिसोड
यह पहला मौका नहीं है जब लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हों। लेकिन इस बार मामला सीधे महुआ विधानसभा सीट से जुड़ा है, जो लालू परिवार की राजनीति का अहम केंद्र रहा है। तेज प्रताप की इस प्रतिक्रिया ने आरजेडी कैंप में हलचल मचा दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी बनाम तेज प्रताप की यह जंग आरजेडी के चुनावी प्रचार पर असर डाल सकती है, क्योंकि दोनों नेताओं का वोट बैंक और जनाधार एक ही वर्ग में बंटा हुआ है।


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