चिराग पासवान का बड़ा दावा: आरजेडी टूट के कगार पर, विपक्ष बिखरा
चिराग पासवान के बड़े बयान के बाद बिहार की राजनीति गरम, राज्यसभा चुनाव में एनडीए की जीत और विपक्ष में टूट के संकेत।
बिहार में राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने सिर्फ सीटों का समीकरण ही नहीं बदला, बल्कि इसके राजनीतिक असर अब साफ तौर पर नजर आने लगे हैं। पांचों सीटों पर एनडीए की जीत ने यह संदेश दिया है कि सत्ता पक्ष पूरी तरह संगठित है, जबकि विपक्षी खेमे में दरारें उभर रही हैं। जदयू से नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर, बीजेपी से नीतिन नवीन और शिवेश कुमार के साथ-साथ एलएसपी के उपेंद्र कुशवाहा की जीत ने एनडीए की मजबूती को और पुख्ता किया है। वहीं आरजेडी के उम्मीदवार एडी सिंह को हार का सामना करना पड़ा, जो महागठबंधन के भीतर समन्वय की कमी को उजागर करता है।
गायब विधायकों ने बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किलें
चुनाव के दौरान विपक्षी खेमे में अनुशासन की कमी खुलकर सामने आई। एआईएमआईएम जैसे बाहर के दल ने तो आरजेडी उम्मीदवार का समर्थन किया, लेकिन कांग्रेस के तीन और आरजेडी के एक विधायक वोट डालने तक नहीं पहुंचे। यह स्थिति विपक्ष के अंदर गहरी असहमति और कमजोर संगठनात्मक पकड़ की ओर इशारा करती है। खास बात यह रही कि कांग्रेस के कई विधायक अंत तक गायब रहे और उनका संपर्क भी नहीं हो पाया, जिससे पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए।
चिराग का दावा, आरजेडी में टूट के आसार
इसी बीच केंद्रीय मंत्री और एलजेपी नेता चिराग पासवान ने विपक्ष पर बड़ा हमला बोला है। उनका कहना है कि यह चुनाव साफ दिखाता है कि विपक्ष पूरी तरह बिखरा हुआ है और आरजेडी के भीतर भी टूट की स्थिति बन रही है। उन्होंने दावा किया कि आरजेडी के कई विधायक उनके संपर्क में हैं। चिराग ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आधी पार्टी ही चुनाव के दौरान गायब रही, जिससे विपक्ष की साख को बड़ा झटका लगा है।
कांग्रेस का आरोप, लेकिन नेतृत्व पर सवाल
कांग्रेस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रदेश स्तर पर नेतृत्व की जिम्मेदारी थी कि सभी विधायकों को एकजुट रखा जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अब पार्टी आरोप लगा रही है कि पैसे के बल पर विधायकों को प्रभावित किया गया और ऑपरेशन लोटस चलाया गया। हालांकि इस पूरे मामले में केंद्रीय नेतृत्व की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि न तो कोई वरिष्ठ नेता निगरानी के लिए भेजा गया और न ही समय रहते स्थिति को संभालने की कोशिश दिखी।
जदयू का पलटवार, विपक्ष पर ही आरोप
दूसरी ओर जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने पलटवार करते हुए कहा कि क्रॉस वोटिंग का खेल खुद विपक्ष ने किया है। उनका कहना है कि एनडीए पूरी तरह एकजुट था और विपक्ष के विधायक खुद ही वोट डालने नहीं आए, इसमें सत्ता पक्ष की कोई भूमिका नहीं है। झा ने यह भी आरोप लगाया कि विधायकों को प्रभावित करने का काम आरजेडी ने किया है।
कांग्रेस में कार्रवाई की मांग तेज
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी माना कि जो विधायक वोटिंग में शामिल नहीं हुए, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने बीजेपी पर धनबल के इस्तेमाल का आरोप लगाया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ कि पार्टी के भीतर अनुशासन की कमी बड़ी समस्या बनकर उभरी है।
आगे की राजनीति पर पड़ेगा सीधा असर
राज्यसभा चुनाव के नतीजे भले ही घोषित हो चुके हों, लेकिन इसका असर आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में गहराई से दिखेगा। सबसे ज्यादा असर विपक्ष की रणनीति और उसके भविष्य पर पड़ेगा, क्योंकि जिस तरह की तस्वीर सामने आई है, उससे यह साफ है कि एकजुटता की कमी आगे भी भारी पड़ सकती है।


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