बिहार में मतदाता सूची में गड़बड़ियों का बड़ा खुलासा, 3 लाख से अधिक वोटर्स को नोटिस
बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान लगभग 3 लाख वोटर्स के दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई गई। चुनाव आयोग ने नोटिस जारी कर सात दिनों में दस्तावेज सत्यापन का आदेश दिया। जानें पूरी प्रक्रिया और ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की अपडेट।
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) ने लगभग 3 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों में विसंगतियां पाई हैं। इन सभी को नोटिस भेजा गया है और उन्हें सात दिनों के भीतर अपने दस्तावेजों की मूल कॉपी के साथ ERO कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों ने कहा है कि जैसे-जैसे विधानसभा क्षेत्रों में दस्तावेजों की जाँच आगे बढ़ेगी, यह संख्या और बढ़ सकती है।
ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल वोटर्स और आवश्यक दस्तावेज
चुनाव आयोग ने 1 अगस्त 2025 को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की, जिसमें 7.24 करोड़ वोटर्स के नाम शामिल हैं। सभी वोटर्स को अपनी पात्रता साबित करने के लिए आयोग द्वारा निर्धारित 11 दस्तावेजों में से कोई एक 1 सितंबर तक जमा करना आवश्यक है।
संसाधनों के अनुसार, अब तक 98.2% वोटर्स ने अपने दस्तावेज जमा कर दिए हैं। लेकिन जिन वोटर्स ने दस्तावेज नहीं दिए, गलत दस्तावेज प्रस्तुत किए, या जिनकी नागरिकता और पात्रता पर संदेह है, उन्हें इस सप्ताह ERO द्वारा नोटिस भेजा जा रहा है।
नोटिस में क्या है और मतदाताओं को क्या करना होगा
ERO द्वारा जारी नोटिस में किसी कानूनी प्रावधान का जिक्र नहीं है। यह सिर्फ एक सामान्य सूचना है ताकि मतदाता सूची में दर्ज प्रविष्टियों का सत्यापन हो सके। नोटिस में कहा गया है कि:
- आपके नाम को गणना फॉर्म और घोषणा के आधार पर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल किया गया था।
- प्रस्तुत दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान गड़बड़ियां मिली हैं, जिससे संदेह है कि आप इस विधानसभा क्षेत्र में वोट देने के योग्य हैं।
- संबंधित मतदाता को निर्देशित किया गया है कि वह निर्धारित समय पर दस्तावेजों की मूल कॉपी लेकर ERO के समक्ष उपस्थित हों।
एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी मतदाता का नाम बिना सुनवाई और उचित आदेश के हटाया नहीं जाएगा।
ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए नाम और नागरिकता प्रमाण
चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को एक विशेष आदेश जारी किया, जिसके तहत बिहार के सभी 7.89 करोड़ रजिस्टरड मतदाताओं को 25 जुलाई तक गणना फॉर्म भरना अनिवार्य किया गया था।
- इस प्रक्रिया में कुल 7.24 करोड़ लोगों ने फॉर्म जमा किया।
- लगभग 65 लाख नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए।
- हटाए गए नामों में मृतक, राज्य से बाहर प्रवासित, या एक से अधिक जगहों पर नामांकित लोग शामिल थे।
- 2003 के बाद रजिस्टरड सभी वोटर्स से जन्मतिथि और जन्मस्थान का प्रमाण मांगा गया।
1 जुलाई 1987 के बाद जन्मे वोटर्स से माता-पिता के दस्तावेज की भी मांग की गई, ताकि उनकी नागरिकता की पुष्टि हो सके।


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