ट्रंप का डबल टैरिफ वार: भारत पर 50% टैक्स का झटका, लाखों नौकरियां खतरे में
अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया है। इससे भारत के 80 अरब डॉलर के निर्यात पर असर पड़ेगा। टेक्सटाइल्स, ज्वेलरी, ऑटो पार्ट्स, सी-फूड और कार्पेट जैसे सेक्टरों में लाखों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले निर्यात पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यानी 27 अगस्त से भारत पर कुल 50% का इम्पोर्ट टैक्स लागू होगा।
भारत की इकोनॉमी पर सीधा असर
भारत हर साल लगभग 80 अरब डॉलर का निर्यात अमेरिका को करता है। यह हमारे कुल निर्यात का लगभग 18% और जीडीपी का करीब 2.5% है। विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ बढ़ने से भारत का निर्यात 50% तक घट सकता है, जिससे जीडीपी में लगभग 0.4% की गिरावट होगी।
विकास दर और निवेश पर खतरा
वित्त वर्ष 2026 में भारत की ग्रोथ रेट 6% से नीचे जा सकती है। रुपये की वैल्यू गिरने और निजी क्षेत्र के निवेश में कमी आने की आशंका है। डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है। हालांकि फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर इस टैरिफ से फिलहाल बचे रहेंगे, लेकिन सर्विस इंडस्ट्री पर गहरा असर पड़ेगा।
टेक्सटाइल्स और अपैरल सेक्टर पर तगड़ा असर
भारत का 10–15 अरब डॉलर का टेक्सटाइल्स और अपैरल निर्यात प्रभावित हो सकता है। इसके चलते लाखों नौकरियां खतरे में आएंगी। अमेरिकी मार्केट के ऑर्डर वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों की ओर शिफ्ट हो सकते हैं, जिससे भारत की ग्लोबल कॉम्पिटिशन कमजोर होगी।
जेम्स और ज्वेलरी इंडस्ट्री संकट में
भारत का लगभग 9–10 अरब डॉलर का जेम्स और ज्वेलरी निर्यात प्रभावित हो सकता है। लाखों कारीगरों की रोज़ी-रोटी पर असर पड़ेगा। हालांकि भारत सरकार दुबई और मैक्सिको में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स खोलने की योजना बना रही है, लेकिन इसमें वक्त लगेगा।
ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री को भारी नुकसान
भारत का करीब 7 अरब डॉलर का ऑटो पार्ट्स एक्सपोर्ट प्रभावित हो सकता है। कार, ट्रक और ट्रैक्टर पार्ट्स इंडस्ट्री में हजारों नौकरियां दांव पर लग सकती हैं।
सी-फूड और कार्पेट इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित
सी-फूड सेक्टर का लगभग 2–3 अरब डॉलर (24,000 करोड़ रुपये) का निर्यात डूब सकता है। ऑर्डर रद्द होने से मजदूरों और किसानों को भारी नुकसान होगा। कार्पेट मेकिंग सेक्टर का 60% निर्यात प्रभावित होगा, जिससे लगभग 25 लाख लोग प्रभावित होंगे।
अन्य सेक्टर भी चपेट में
लेदर, केमिकल्स और मैकेनिकल मशीनरी सेक्टर के एक्सपोर्ट पर भी असर पड़ सकता है। इससे लाखों लोगों की नौकरियां खतरे में हैं।


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