काबुल में खुलेगा भारतीय दूतावास: भारत-अफगानिस्तान रिश्तों में बढ़ेगी नई कूटनीतिक उड़ान

भारत ने काबुल में अपने तकनीकी मिशन को पूर्ण भारतीय दूतावास का दर्जा देने की घोषणा की है। इस कदम को अफगान विदेश मंत्री मु्त्ताकी की भारत यात्रा और जयशंकर की बैठक ने और महत्वपूर्ण बना दिया। जानिए भारत–अफगानिस्तान रिश्तों में इस ऐतिहासिक बदलाव का मतलब।

काबुल में खुलेगा भारतीय दूतावास: भारत-अफगानिस्तान रिश्तों में बढ़ेगी नई कूटनीतिक उड़ान
S. Jaishankar

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी भारत की यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्होंने और भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने नई सरकारी-स्तरीय बातचीत की।

भारत ने अहम घोषणा करते हुए कहा कि काबुल में मौजूद तकनीकी मिशन (Technical Mission) को अब पूर्ण भारतीय दूतावास (Full Embassy) का दर्जा दिया जाएगा। 

इस कदम को भारत–तालिबान शासन के बीच उच्चतम स्तर की कूटनीतिक सुलह की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। 

मुलाकात और राजनयिक संवाद
जयशंकर ने मुत्ताकी से मुलाकात में कहा कि उनकी यह भारत यात्रा दो देशों के संबंधों को एक नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है। मुत्ताकी ने भी कहा, अफगानिस्तान भारत को एक घनिष्ठ मित्र मानता है … हम आपसी सम्मान, व्यापार और लोगों के बीच संबंधों पर आधारित मजबूत रिश्ते चाहते हैं।

उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि अफगानिस्तान किसी भी समूह को अपनी जमीन का उपयोग दूसरों के खिलाफ करने की अनुमति नहीं देगा।

भारत की सहायता और विकास योजनाएं
भारत ने अफगानिस्तान को 20 एम्बुलेंस, एमआरआई / सीटी-स्कैन मशीनें, टीकाकरण एवं कैंसर दवाइयाँ देने की घोषणा की। जयशंकर ने प्रतीकात्मक रूप से 5 एम्बुलेंस मुत्ताकी को हस्तांतरित कीं। 

भारत ने कहा कि 6 नई परियोजनाएँ शुरू करने का पक्ष रखता है, और अफगानिस्तान के भूकंप प्रभावित क्षेत्रों व अन्य विकास कार्यों में सहयोग जारी रहेगा। 

जयशंकर ने इस दौरान यह भी ज़ोर दिया कि दोनों देश आतंकवाद (terrorism) के खिलाफ मिलकर काम करें और क्षमता समन्वय करें। 

राजनयिक मायने और चुनौतियाँ
भारत ने 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद काबुल में अपना दूतावास बंद कर दिया था।  बाद में सितंबर 2022 में भारत ने एक तकनीकी टीम भेजी थी, जो अब तक सीमित स्तर पर काम कर रही थी। 

दूतावास का दर्जा देने का यह निर्णय भारत के लिए एक रणनीतिक पुनर्मूल्यांकन (Strategic Re-engagement) का संकेत है — जिससे वह अफगानिस्तान में अपनी कूटनीतिक उपस्थिति को मजबूत करना चाहता है। 

हालांकि, भारत फिलहाल तालिबान शासन को औपचारिक मान्यता नहीं देता, और मानवाधिकार, विशेषकर महिलाओं की स्थिति, एक बड़ी संवेदनशीलता है।