नहीं सुधरेगा पाकिस्तान... सिंधु जल समझौते को सस्पेंड करने पर बिलावल भुट्टो ने दी परमाणु युद्ध की धमकी
भारत के सिंधु जल संधि को सस्पेंड करने के फैसले पर पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने परमाणु युद्ध की धमकी दी है। वॉशिंगटन में दिए गए बयान में उन्होंने भारत पर जल संसाधनों को बाधित करने का आरोप लगाया और अमेरिका से हस्तक्षेप की अपील की।
पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty) को लेकर भारत को परमाणु युद्ध की धमकी दी है। गुरुवार, 5 जून 2025 को वॉशिंगटन के मिडल ईस्ट इंस्टीट्यूट में दिए गए बयान में उन्होंने कहा कि भारत का सिंधु जल समझौता सस्पेंड करने का फैसला जल युद्ध की शुरुआत का कारण बन सकता है।
बिलावल ने कहा, हमने घोषणा की है कि हमारी जल आपूर्ति को काटना युद्ध की कार्रवाई होगी। यह हमारे लिए अस्तित्व का संकट है। कोई भी देश अपने पानी और अस्तित्व के लिए लड़ेगा। उन्होंने अमेरिका से आग्रह किया कि वह भारत को संधि का पालन करने और बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर करे।
भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव
भारत ने 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को सस्पेंड करने का फैसला किया। इसके जवाब में पाकिस्तान ने शिमला समझौते समेत भारत के साथ सभी द्विपक्षीय समझौतों को स्थगित करने और अटारी-वाघा बॉर्डर को बंद करने की घोषणा की। पाकिस्तान ने भारत के साथ व्यापार को भी निलंबित कर दिया है।
सिंधु जल संधि का इतिहास
1960 में वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि में भारत को पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) और पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का पानी मिला था। भारत का कहना है कि पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन कर रहा है और इसी कारण भारत ने यह सख्त कदम उठाया।
पाकिस्तान की धमकी और अपील
बिलावल भुट्टो ने भारत पर संधि के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा, "अगर शांति और कूटनीति सफल होनी है, तो भारत को पुरानी संधियों का पालन करना होगा।" उन्होंने कहा कि जल संकट पर भारत का कदम युद्ध की कार्रवाई के समान है।
अमेरिका से हस्तक्षेप की मांग
बिलावल ने अमेरिका और अन्य देशों से अपील की कि वे भारत पर दबाव डालें ताकि सिंधु जल संधि का पालन हो सके। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों पर नियंत्रण को लेकर किसी भी विवाद का समाधान कूटनीतिक रूप से होना चाहिए।


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