ईरान में बदलाव की हुंकार: रोम की सड़कों पर गूंजा ‘न जंग, न झुकाव’ का नारा; खामेनेई के शासन के अंत की उठी मांग

ईरान के प्रतिबंधित संगठन MEK ने रोम में विशाल रैली कर ईरान में शासन परिवर्तन और कट्टरपंथ के अंत की मांग की। जानें कौन-कौन शामिल हुआ, क्या बोले वैश्विक नेता और क्यों यह रैली ऐतिहासिक मानी जा रही है।

ईरान में बदलाव की हुंकार: रोम की सड़कों पर गूंजा ‘न जंग, न झुकाव’ का नारा; खामेनेई के शासन के अंत की उठी मांग
Ali Khamenei

इटली की राजधानी रोम में गुरुवार को एक असाधारण दृश्य देखने को मिला जब ईरान के प्रतिबंधित विपक्षी संगठन मुजाहिद्दीन-ए-खल्क (MEK) ने एक विशाल रैली आयोजित की। करीब 10,000 प्रदर्शनकारी, सिर पर स्कार्फ बांधे, हाथों में बैनर लिए, लोकतंत्र और मानवाधिकारों की मांग करते हुए रोम की सड़कों पर उमड़ पड़े।

रैली की थीम: न जंग, न झुकाव – बदलाव जनता के हाथों
इस आयोजन की थीम ने साफ संदेश दिया कि अब ईरान की जनता सिर्फ युद्ध या झुकाव नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक बदलाव चाहती है। रैली के दौरान हजारों लोगों ने एक साथ आवाज बुलंद की - खामेनेई की तानाशाही नहीं चलेगी!

खामेनेई के खिलाफ सशक्त नारों की गूंज
रैली में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को सत्ता से हटाने की मांग प्रमुख रही। MEK समर्थकों ने ईरान में कट्टरपंथी शासन के अंत और महिलाओं के अधिकार, राजनीतिक स्वतंत्रता, तथा मानवाधिकारों की बहाली की अपील की।

वैश्विक नेताओं की मौजूदगी: अमेरिका-ब्रिटेन-यूरोप की आवाज
इस विरोध प्रदर्शन में कई प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय नेता शामिल हुए, जैसे: न्यूयॉर्क के पूर्व मेयर रूडी गिउलियानी, ब्रिटेन के पूर्व विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली, यूरोपीय परिषद के पूर्व अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल।

इन नेताओं ने ईरानी शासन की अमानवीय नीतियों, फांसी की बढ़ती घटनाओं और नागरिकों के उत्पीड़न की कड़ी आलोचना की।

MEK प्रमुख और रेजा पहलवी आमने-सामने?
सूत्रों के अनुसार, इस रैली के दौरान MEK के प्रमुख की ईरान के निर्वासित नेता रेजा पहलवी से संभावित मुलाकात की चर्चा है। रेजा वर्तमान में म्यूनिख (जर्मनी) में हैं और उनका परिवार शाह के शासन से जुड़ा रहा है।

मानवाधिकार उल्लंघन पर अंतरराष्ट्रीय आक्रोश
ईरानी अदालतें MEK कार्यकर्ताओं पर देशद्रोह, आतंकवाद, ईश्वर के खिलाफ युद्ध, और जासूसी जैसे गंभीर आरोप लगाती रही हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इन सुनवाइयों को "पक्षपाती और क्रूर" करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2024 में 901 फांसी दी गईं — 2015 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: MEK का संघर्ष
 1970 के दशक में MEK ने ईरान में शाह शासन और अमेरिकी हस्तक्षेप का विरोध किया। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह संगठन सत्ता से बाहर कर दिया गया।
तब से MEK की ईरान सरकार से सीधी टकराव की नीति रही है। वर्तमान में इसके नेता पेरिस में हैं और लगभग 2,500 सदस्य अल्बानिया में शरण लिए हुए हैं।