‘हिंदी की ज़बरदस्ती’ पर घमासान: उद्धव-फडणवीस की बंद कमरे में 20 मिनट की सियासी जंग

महाराष्ट्र विधानसभा में उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस की मुलाक़ात में विपक्ष के नेता पद, हिंदी भाषा विवाद और मराठी अस्मिता जैसे मुद्दों पर हुई अहम चर्चा। पढ़ें पूरी खबर।

‘हिंदी की ज़बरदस्ती’ पर घमासान: उद्धव-फडणवीस की बंद कमरे में 20 मिनट की सियासी जंग

महाराष्ट्र विधानसभा में गुरुवार (17 जुलाई) को एक अहम राजनीतिक मुलाक़ात ने सबका ध्यान खींचा। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच विधानसभा के अंटी-चेंबर में करीब 20 मिनट तक चर्चा हुई, जिसमें विधानसभा में विपक्ष के नेता का पद, त्रिभाषा फार्मूला और हिंदी भाषा की अनिवार्यता जैसे मुद्दे छाए रहे।

इस मुलाक़ात के दौरान उद्धव ठाकरे के साथ उनके विधायक बेटे आदित्य ठाकरे और ठाकरे गुट के अन्य विधायक भी मौजूद रहे।

'हिंदी की ज़बरदस्ती' किताब भेंट की, फडणवीस ने दिया सुझाव
बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री को ‘हिंदी की ज़बरदस्ती आखिर क्यों?’ शीर्षक वाली एक पुस्तक भेंट की। देवेंद्र फडणवीस ने किताब स्वीकारते हुए सुझाव दिया कि इसे विधानसभा में इस विषय पर बनी समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जाधव को भी दी जानी चाहिए।

उद्धव को मिला फडणवीस का ऑफर
गौरतलब है कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन अब तक यह पद ठाकरे गुट को नहीं मिला है। इस संदर्भ में ही उद्धव और आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री से बैठक की। 

हालांकि सदन में देवेंद्र फडणवीस ने मजाकिया अंदाज में उद्धव ठाकरे को एनडीए के साथ आने का ऑफर भी दे डाला। फडणवीस ने कहा, 2029 तक तो कोई स्कोप नहीं है, लेकिन उद्धवजी, आपको यहां शामिल करने पर विचार किया जा सकता है। इस पर उद्धव ने मीडिया से कहा, जाने दीजिए, ये सब हंसी मजाक की बातें हैं।

राज ठाकरे के साथ बढ़ती नज़दीकियों के बीच इस मुलाक़ात के मायने
यह मुलाक़ात ऐसे वक्त हुई है जब महाराष्ट्र में मराठी बनाम हिंदी विवाद ने जोर पकड़ा हुआ है। पांच जुलाई को उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने एक संयुक्त रैली की थी, जिसमें उन्होंने मराठी भाषा के पक्ष में राज्य सरकार की आलोचना की।

अब राज ठाकरे के साथ बढ़ती नजदीकियों और हिंदी की अनिवार्यता के खिलाफ मोर्चा लेने के बीच उद्धव और फडणवीस की मुलाक़ात के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।