Modi–Putin Meet: यूक्रेन शांति से लेकर Defence-Energy Partnership तक, हैदराबाद हाउस में हुई निर्णायक बातचीत

PM Modi और Vladimir Putin की Hyderabad House में हुई अहम बैठक में यूक्रेन शांति, Defence Cooperation, Energy Trade और Strategic Partnership पर बड़ी चर्चा हुई।

Modi–Putin Meet: यूक्रेन शांति से लेकर Defence-Energy Partnership तक, हैदराबाद हाउस में हुई निर्णायक बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय बैठक के दौरान हाथ मिलाते हुए

हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दूसरी दिन की मुलाकात ने वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका को एक बार फिर मजबूत किया। दोनों नेताओं के बीच हुई यह द्विपक्षीय बैठक कई अहम मुद्दों पर केंद्रित रही, जिसमें सबसे प्रमुख रहा यूक्रेन संकट, वैश्विक शांति, रक्षा सहयोग और ऊर्जा व्यापार। बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने भरोसे, मित्रता और निरंतर संवाद को भारत-रूस रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत बताया।

यूक्रेन संकट पर भारत की स्पष्ट “Peace First” नीति
यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत कभी भी युद्ध के पक्ष में नहीं रहा है और वह हमेशा शांति का समर्थन करता आया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत किसी भी तरह की न्यूट्रल पॉलिसी में विश्वास नहीं करता, बल्कि शांति के पक्ष में सक्रिय भूमिका निभाता है। पीएम मोदी ने पुतिन को भरोसेमंद मित्र बताते हुए कहा कि संकट के पूरे दौरान रूस ने भारत को सभी घटनाक्रमों से अवगत कराया।

पुतिन ने माना भारत का Global Peace Role
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी पीएम मोदी के शांति प्रयासों की सराहना की और कहा कि रूस यूक्रेन विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने यह स्वीकार किया कि भारत ने वैश्विक मंच पर शांति के लिए जो प्रयास किए हैं, वह सराहनीय हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया की नजरें यूक्रेन युद्ध की संभावित दिशा पर टिकी हुई हैं।

Defence, Energy और Economy बने बातचीत के मजबूत Pillar
बैठक में रक्षा सहयोग, ऊर्जा व्यापार और आर्थिक साझेदारी पर भी गंभीर चर्चा हुई। दोनों देशों ने Defence Technology, Oil-Gas Supply और Trade Expansion को और मजबूती देने पर सहमति जताई। भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप नए आयाम देने पर जोर दिया गया।

Top Leadership की मौजूदगी ने बढ़ाया बैठक का Strategic Weight
इस अहम बैठक के दौरान भारत की तरफ से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव और भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास सहित कई शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। यह उपस्थिति इस बात का संकेत मानी जा रही है कि बातचीत सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा स्तर पर भी बेहद महत्वपूर्ण रही।