शरजील इमाम–उमर खालिद जमानत मामला: यूएपीए को लेकर ओवैसी का कांग्रेस पर सीधा हमला

दिल्ली दंगों के मामले में शरजील इमाम और उमर खालिद को जमानत न मिलने पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने यूएपीए कानून को लेकर कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। पढ़ें पूरी खबर।

शरजील इमाम–उमर खालिद जमानत मामला: यूएपीए को लेकर ओवैसी का कांग्रेस पर सीधा हमला
Asaduddin Owaisi

दिल्ली दंगों के मामलों में गिरफ्तार शरजील इमाम और उमर खालिद को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से जमानत नहीं मिली। अदालत के इस फैसले के बाद अब सियासत गरमा गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने जमानत खारिज होने के पीछे कांग्रेस की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।

ओवैसी का कहना है कि गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए के सख्त प्रावधानों को और मजबूत करने का काम कांग्रेस ने ही किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी कानून की कठोरता के कारण आज शरजील इमाम और उमर खालिद जैसे कार्यकर्ताओं को वर्षों तक जेल में रहना पड़ रहा है और उन्हें राहत नहीं मिल पा रही।

पी. चिदंबरम के दौर के संशोधनों पर सवाल
एआईएमआईएम प्रमुख ने विशेष तौर पर पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम के कार्यकाल का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, यूपीए सरकार के दौरान यूएपीए में जो संशोधन लाए गए, वही आज अदालतों में जमानत खारिज करने का आधार बन रहे हैं। ओवैसी ने कहा कि इन बदलावों का असर अब सामने आ रहा है और इन्हें दुरुपयोग का जरिया बनाया जा रहा है।

आतंकवाद की परिभाषा पर आपत्ति
ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने साफ किया कि जमानत क्यों नहीं दी जा सकती। उन्होंने बताया कि यूपीए शासनकाल में यूएपीए में आतंकवाद की परिभाषा को जिस तरह जोड़ा गया, उसने कानून को बेहद व्यापक और अस्पष्ट बना दिया है।

लोकसभा में दी गई चेतावनी की याद
अपने पुराने लोकसभा भाषण को याद करते हुए ओवैसी ने कहा कि उन्होंने 2007–08 में ही संसद में यूएपीए की कुछ धाराओं को लेकर चेतावनी दी थी। उनका तर्क था कि कानून में इस्तेमाल की गई भाषा इतनी व्यक्तिपरक है कि इसका मतलब हर मामले में अलग-अलग निकाला जा सकता है।

व्यक्तिपरक कानून और अभिव्यक्ति की आज़ादी
ओवैसी ने धारा 15 का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें “किसी भी अन्य माध्यम से” जैसी पंक्तियां जोड़ी गई हैं, जो कानून को खतरनाक बना देती हैं। उनके अनुसार, ऐसी भाषा के आधार पर किसी लेखक, विचारक या सामाजिक कार्यकर्ता को भी निशाना बनाया जा सकता है और यह तय करने वाला आखिर कौन होगा कि क्या आतंकवाद है और क्या नहीं।

पुरानी आशंकाएं आज हुईं सच
उन्होंने कहा कि आज शरजील इमाम और उमर खालिद को जमानत न मिलने का आधार वही प्रावधान बने हैं, जिन पर उन्होंने सालों पहले आपत्ति जताई थी। ओवैसी के मुताबिक, जिन आशंकाओं को उन्होंने तब व्यक्त किया था, वही अब हकीकत में बदलती दिख रही हैं।

लंबी कैद पर कांग्रेस से तीखे सवाल
असदुद्दीन ओवैसी ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आज दो नौजवान साढ़े पांच साल से जेल में बंद हैं, लेकिन उन्हें जमानत नहीं मिल रही। उन्होंने सवाल उठाया कि आज़ादी के बाद क्या कभी कांग्रेस का कोई बड़ा नेता इतने लंबे समय तक बिना सजा के जेल में रहा है।