पटना में बनेगा भारत का पहला ‘एनर्जी म्यूजियम’, बंद पड़े थर्मल प्लांट को मिलेगी नई पहचान
पटना में बंद पड़े करबिगहिया थर्मल पावर प्लांट को भारत के पहले ‘एनर्जी म्यूजियम’ में बदलने की तैयारी तेज़। मुख्यमंत्री के सलाहकार अंजनी कुमार सिंह की अध्यक्षता में परियोजना पर उच्चस्तरीय बैठक, एजेंसी चयन और समयसीमा पर मिले निर्देश।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सलाहकार एवं बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को पटना में प्रस्तावित ऊर्जा संग्रहालय परियोजना को लेकर अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में ऊर्जा विभाग के सचिव और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक मनोज कुमार सिंह तथा एनबीपीडीसीएल के एमडी राहुल कुमार भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर विस्तृत प्रस्तुति रखी और इसके रोडमैप पर विचार-विमर्श हुआ।
परियोजना की अवधि और एजेंसी चयन पर मिले निर्देश
बैठक के दौरान महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने परियोजना की समय-सीमा, चयनित एजेंसी की योग्यता और उसकी नियुक्ति प्रक्रिया पर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि यह परियोजना केवल एक संग्रहालय नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र के इतिहास, तकनीक और भविष्य की अवधारणाओं को एक साथ जोड़ने वाला प्रमुख केंद्र बनेगी।
करबिगहिया थर्मल प्लांट को मिलेगी नई जमीन
पटना के करबिगहिया में स्थित बंद पड़े थर्मल पावर प्लांट की लगभग 3 एकड़ भूमि को आधुनिक ऊर्जा संग्रहालय में बदला जाएगा। यह भारत का पहला और दुनिया का चौथा समर्पित ऊर्जा संग्रहालय होगा। इसका उद्देश्य ऊर्जा अनुसंधान, पर्यटन और विरासत को एक साथ जोड़ते हुए एक इंटरैक्टिव अनुभव देना है, जिससे विद्यार्थी, शोधकर्ता और आम आगंतुक ऊर्जा क्षेत्र के विकास को करीब से समझ सकें।
वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञ टीम की मौजूदगी
बैठक में बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा, पावर होल्डिंग कंपनी के मुख्य अभियंता (सिविल) और कार्यपालक अभियंता अशोर कुमार सहित विशेष समिति के सदस्य—चंद्रशेखर कुमार, विनय कुमार, सौम्या, नुपूर और केका कुमारी उपस्थित थे। सभी सदस्यों ने परियोजना से जुड़े तकनीकी और संरचनात्मक पहलुओं पर अपनी राय दी।


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