लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ की गूंज: पीएम मोदी ने याद दिलाया, कहा- जब ‘वंदे मातरम’ बोलना बन गया अपराध
लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ पर ऐतिहासिक चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके 150 साल के गौरवशाली सफर, आज़ादी के संघर्ष, आपातकाल के दौर और 2047 के विकसित भारत के संकल्प पर विस्तार से बात की।
लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ पर शुरू हुई ऐतिहासिक चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गीत को केवल एक नारे से ऊपर बताते हुए उसे भारत की आत्मा की आवाज करार दिया। उन्होंने बताया कि किस तरह ब्रिटिश शासन के दौरान ‘वंदे मातरम’ बोलना भी अपराध बना दिया गया था और इसके लिए लोगों को सख्त सज़ाएं दी जाती थीं। बावजूद इसके, देशवासियों ने इस उद्घोष को अपनी सांसों में बसा लिया और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ इसे संघर्ष का सबसे ताकतवर हथियार बना दिया।
आज़ादी की लड़ाई में महिलाओं का मौन विद्रोह
प्रधानमंत्री मोदी ने बंगाल के बारिसाल की एक वीरांगना सरोजनी बोष का उदाहरण देते हुए सदन को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि जब अंग्रेजों ने ‘वंदे मातरम’ पर रोक लगाई, तब सरोजनी बोष ने सार्वजनिक रूप से ऐलान किया था कि जब तक यह प्रतिबंध नहीं हटेगा, वह अपनी चूड़ियां नहीं पहनेंगी। उस दौर में चूड़ियां उतारना स्त्री जीवन का सबसे बड़ा त्याग माना जाता था। उन्होंने सोने की चूड़ियां उतारकर अंग्रेजों के सामने एक मौन लेकिन बेहद शक्तिशाली विरोध दर्ज कराया था।
बच्चों की आवाज बनी पूरे देश की आवाज
प्रधानमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि उस दौर में सिर्फ बड़े नहीं, बल्कि बच्चे तक आज़ादी की लड़ाई में पीछे नहीं थे। बहुत कम उम्र के बच्चे प्रभात फेरियों में निकलते, ‘वंदे मातरम’ का नारा लगाते और इसके लिए जेलों में डाल दिए जाते थे, कोड़े तक खाए जाते थे। लेकिन फिर भी उनका हौसला नहीं टूटा। उन नन्हें क्रांतिकारियों के लिए ‘वंदे मातरम’ केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन तक कुर्बान करने की प्रेरणा था।
150 साल का गौरव, इतिहास का सजीव उत्सव
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिस उद्घोष ने आज़ादी के आंदोलन को ऊर्जा दी, त्याग और तपस्या का रास्ता दिखाया, उसका पुण्य स्मरण करना आज की पीढ़ी का सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने पर पूरा देश इस गौरवशाली क्षण का साक्षी बन रहा है। यह सिर्फ एक गीत की सालगिरह नहीं, बल्कि भारत के आत्मसम्मान और बलिदान की विरासत का उत्सव है।
जब 100 साल पर भी जंजीरों में था देश
प्रधानमंत्री ने 100 साल पहले के उस दौर को भी याद किया जब ‘वंदे मातरम’ का शताब्दी वर्ष आपातकाल के साए में डूबा हुआ था। उन्होंने कहा कि उस समय देश संविधान की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दबा दी गई थी और देशभक्ति के लिए जीने-मरने वाले लोग सलाखों के पीछे डाल दिए गए थे। वह स्वतंत्र भारत का एक काला अध्याय था, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
2047 के विकसित भारत तक का संकल्प
पीएम मोदी ने कहा कि आज जब ‘वंदे मातरम’ 150 वर्ष का हो चुका है, तब देश एक नए आत्मविश्वास और संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य सामने है और इस संकल्प को दोहराने का इससे बड़ा अवसर शायद कोई और नहीं हो सकता। उन्होंने याद दिलाया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में ‘वंदे मातरम’ की रचना ऐसे समय में की थी, जब 1857 के विद्रोह के बाद अंग्रेजी सत्ता और भी क्रूर हो गई थी और भारत पर अत्याचार चरम पर थे।
गुलामी के गीत के खिलाफ स्वाधीनता का स्वर
प्रधानमंत्री ने कहा कि उस दौर में अंग्रेज अपने गीत ‘गॉड सेव द क्वीन’ को देश-भर में फैलाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ‘वंदे मातरम’ उस गुलामी के गीत का जवाब बनकर उभरा। यह सिर्फ अंग्रेजों को भारत से बाहर करने की लड़ाई का मंत्र नहीं था, बल्कि इसने भारत माता की आत्मा को भी गुलामी से मुक्त कराने का रास्ता दिखाया।
भारत माता का चंडी स्वरूप और सभ्यता का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वक्तव्य में ‘वंदे मातरम’ के भावार्थ को भी समझाया। उन्होंने कहा कि यह गीत भारत माता को केवल समृद्धि देने वाली देवी के रूप में ही नहीं, बल्कि दुश्मनों के सामने चंडी रूप में खड़े रहने वाली शक्ति के तौर पर भी देखता है। यह गीत भारत को ज्ञान, शक्ति, समृद्धि और साहस का प्रतीक मानता है। इसी वजह से ‘वंदे मातरम’ हर भारतीय का व्यक्तिगत संकल्प बन गया।
एक गीत, जो बन गया राष्ट्र की आत्मा
पीएम मोदी ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ की यात्रा किसी एक घटना तक सीमित नहीं, बल्कि यह उस नदी की तरह है, जिसके साथ सदियों की सांस्कृतिक धारा बहती चली आती है। आज़ादी की पूरी गाथा इस एक भाव से बंधी हुई है। शायद ही दुनिया में कोई और ऐसा काव्य हो, जो किसी राष्ट्र के संघर्ष, आत्मा और भविष्य तीनों को एक साथ इतनी गहराई से व्यक्त करता हो। अंग्रेज भी यह समझ चुके थे कि ऐसी चेतना के सामने उनका टिक पाना संभव नहीं है।


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