असली संत कौन? धीरेंद्र शास्त्री, देवकीनंदन और अनिरुद्धाचार्य को लेकर प्रदीप मिश्रा का चौंकाने वाला खुलासा

भोपाल में टीवी9 के मंच पर प्रदीप मिश्रा ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री, देवकीनंदन और अनिरुद्धाचार्य को संत कहना सही नहीं। उन्होंने संत और कथावाचक के बीच फर्क समझाया और मंच से जिम्मेदार शब्दों के इस्तेमाल की सलाह दी।

असली संत कौन? धीरेंद्र शास्त्री, देवकीनंदन और अनिरुद्धाचार्य को लेकर प्रदीप मिश्रा का चौंकाने वाला खुलासा
प्रदीप मिश्रा टीवी9 सत्ता सम्मेलन भोपाल में बोलते हुए

भोपाल में टीवी9 के मंच पर कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने संतों की परिभाषा को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल लोकप्रियता या मंच पर प्रवचन देने भर से कोई संत नहीं बनता। इसी क्रम में उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री, देवकीनंदन और अनिरुद्धाचार्य को असली संत नहीं माना।

संत बनाम कथावाचक
प्रदीप मिश्रा ने कहा कि असली संत वही है जिसके भीतर शांति, संतोष और परमात्मा के प्रति निकटता हो। अगर कोई दूसरों को शांति और उपदेश देता है लेकिन खुद उस पर अमल नहीं करता, तो उसे संत कहना गलत होगा। ऐसे लोगों को केवल कथावाचक की उपाधि दी जा सकती है।

मंच से शब्दों का जिम्मेदार इस्तेमाल
प्रदीप मिश्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि मंच से ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जिससे समाज में विवाद या गुस्सा पैदा हो। संत और कथावाचक दोनों को अपनी मर्यादा में रहना जरूरी है।

संतों के झगड़े और समाज पर असर
संतों के बीच विवाद और आरोप-प्रत्यारोप पर उन्होंने कहा कि जब संत आपस में झगड़ते हैं तो लोग उनसे दूर होकर भगवान की ओर जाते हैं। असली संत वही है जिसके भीतर संतोष और शांति हो।

समाज की कमजोरियां और संगति का महत्व
उन्होंने कहा कि आज मनुष्य जानवरों से गुण तो ले लेता है लेकिन अच्छाई नहीं। इंसान लोमड़ी की चालाकी और शेर की हिंसक प्रवृत्ति तो अपना लेता है, लेकिन वफादारी नहीं। मिश्रा ने कहा कि संतों की संगति का मतलब सिर्फ चिलम पीना नहीं है, बल्कि यह सीखना है कि बुराइयों से दूर रहना चाहिए।

संस्कृत विवाद पर प्रतिक्रिया
हाल ही में रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद महाराज के संस्कृत ज्ञान पर सवाल उठाए थे। इस पर मिश्रा ने कहा कि संस्कृत ज्ञान न होने पर भी अगर किसी में भाव और सरलता है तो वह भगवान का प्रिय है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सनातन को मजबूत करना है तो सभी संतों को एकजुट होना होगा।