Putin India Visit: दिल्ली में रेड कार्पेट, इस्लामाबाद में बेचैनी और तालिबान की मुस्कान

चार साल बाद भारत पहुंचे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दौरे से पाकिस्तान बेचैन है, जबकि तालिबान शासन बेहद खुश नजर आ रहा है। पुतिन के बयान और भारत-रूस की संयुक्त रणनीति ने अफगान राजनीति में बड़ा संकेत दे दिया है।

Putin India Visit: दिल्ली में रेड कार्पेट, इस्लामाबाद में बेचैनी और तालिबान की मुस्कान
Prime Minister Narendra Modi and Russian President Vladimir Putin

चार साल के अंतराल के बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंचे तो दिल्ली ने उनका भव्य स्वागत किया और रेड कार्पेट बिछा दिया। लेकिन इस दौरे की सबसे दिलचस्प तस्वीर भारत में नहीं बल्कि पाकिस्तान में दिखी, जहां इस यात्रा को लेकर साफ घबराहट महसूस की जा रही है। हैरानी की बात यह रही कि पाकिस्तान जहां असहज है, वहीं उसका एक और पड़ोसी देश अफगानिस्तान का तालिबान शासन इस दौरे से सबसे ज्यादा खुश नजर आ रहा है।

बदली वैश्विक रणनीति से तालिबान को संबल
तालिबान, जिसे अब तक दुनिया का बड़ा हिस्सा औपचारिक मान्यता देने से कतराता रहा है, अचानक खुद को बदलती वैश्विक राजनीति के केंद्र में पाता दिख रहा है। भारत और रूस की अफगानिस्तान को लेकर बदली हुई रणनीति ने तालिबान की उम्मीदों को नया भरोसा दिया है। खास बात यह है कि जिन देशों को तालिबान अब तक शक की नजर से देखता रहा, वही देश अब उसके लिए कूटनीतिक संबल बनते दिखाई दे रहे हैं।

तालिबान पर पुतिन का चौंकाने वाला खुला संदेश
दिल्ली में भारतीय मीडिया से बातचीत के दौरान व्लादिमीर पुतिन ने तालिबान को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने अंतरराष्ट्रीय हलकों में भी हलचल मचा दी। पुतिन ने साफ कहा कि अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान का पूरा नियंत्रण है और यह एक वास्तविकता है, जिसे नकारा नहीं जा सकता। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि तालिबान ने ISIS और दूसरे आतंकी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की है और अफीम के उत्पादन में भी पहले से काफी कमी लाई गई है।

अफगानिस्तान को लेकर भारत-रूस की साझा रणनीति
23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में अफगानिस्तान को लेकर दोनों देशों के बीच अभूतपूर्व तालमेल देखने को मिला। संयुक्त बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि आतंकवाद के खिलाफ एक समावेशी और मजबूत रणनीति बनाई जाए, ISIS-K जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों पर सख्त कार्रवाई हो, अफगान जनता तक मानवीय सहायता बिना किसी रुकावट के पहुंचे और सुरक्षा एजेंसियों के बीच नियमित संवाद बना रहे।

तालिबान को मिली नई अंतरराष्ट्रीय वैधता
कूटनीतिक जानकारों की मानें तो यह साझा रुख तालिबान के लिए किसी अंतरराष्ट्रीय समर्थन पत्र से कम नहीं है। रूस की ओर से मिल रही औपचारिक स्वीकृति और भारत का बढ़ता संवाद तालिबान को वह राजनीतिक वैधता दे रहा है, जिसकी उसे लंबे समय से तलाश थी। यही वजह है कि काबुल में इस दौरे को लेकर उत्साह दिख रहा है।

पाकिस्तान की रणनीतिक पकड़ पर सीधा असर
उधर दूसरी ओर पाकिस्तान की चिंता बढ़ती जा रही है। अफगानिस्तान पर रूस और भारत का प्रभाव बढ़ने से पाकिस्तान की वह रणनीतिक पकड़ कमजोर पड़ती दिख रही है, जिसे वह वर्षों से “रणनीतिक गहराई” के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। खासतौर पर ISIS-K के खिलाफ भारत-रूस की साझा रणनीति पाकिस्तान के क्षेत्रीय प्रभाव को सीमित करती नजर आ रही है।