बाढ़ में डूबा पाकिस्तान, मंत्री ख्वाजा आसिफ का विवादित बयान – 'ये खुदा की रहमत है, पानी को स्टोर कर लें'

पाकिस्तान बाढ़ संकट गहराता जा रहा है। पंजाब, KPK और PoK में तबाही के बीच रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बयान “बाढ़ का पानी स्टोर कर लें” सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जानें पूरी रिपोर्ट।

बाढ़ में डूबा पाकिस्तान, मंत्री ख्वाजा आसिफ का विवादित बयान – 'ये खुदा की रहमत है, पानी को स्टोर कर लें'
Khawaja Asif

पाकिस्तान इन दिनों भीषण बाढ़ संकट से गुजर रहा है। पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा (KPK) और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) समेत कई इलाकों में लगातार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं, फसलें बर्बाद हो गई हैं और पशुधन का भारी नुकसान हुआ है। ऐसे हालात में जनता सरकार से मदद की उम्मीद कर रही थी, लेकिन रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बेतुके बयान ने सबको चौंका दिया।

"बाढ़ का पानी स्टोर कर लें" – मंत्री का वायरल बयान
एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में जब एंकर ने उनसे राहत कार्यों को लेकर सवाल पूछा, तो ख्वाजा आसिफ ने हैरान कर देने वाला जवाब दिया। उन्होंने कहा – “ये तो खुदा की रहमत है, लोगों को चाहिए कि वे इस पानी को बाल्टियों और टबों में भरकर स्टोर कर लें ताकि आने वाले वक्त में काम आ सके।”

उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कई यूजर्स ने कटाक्ष करते हुए लिखा – “क्या अब जनता अपने घरों में टैंक बनाकर बाढ़ का पानी जमा करेगी?”

भारत पर लगाया बाढ़ लाने का आरोप
विवादित बयान यहीं खत्म नहीं हुआ। सियालकोट के दौरे के दौरान ख्वाजा आसिफ ने बाढ़ के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया। उनका दावा था कि “भारत से छोड़ा गया पानी पाकिस्तान में तबाही मचा रहा है। ये पानी लाशें, मवेशी और मलबा अपने साथ लेकर आता है।”

उन्होंने कहा कि इस वजह से प्रशासन को पानी निकालने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पानी को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच पहले भी कई बार आरोप-प्रत्यारोप हो चुके हैं, लेकिन ऐसे बयान मौजूदा आपदा के समय और भी संवेदनशील हो जाते हैं।

सोशल मीडिया पर गुस्सा और व्यंग्य
सोशल मीडिया पर मंत्री के इस बयान को लेकर पाकिस्तानियों का गुस्सा फूट पड़ा है। कुछ यूजर्स ने इसे “आपदा को अवसर” वाली सोच बताया, तो कुछ ने इसे सरकार की नाकामी को छिपाने की कोशिश करार दिया। वहीं, राहत एजेंसियों का कहना है कि जमीनी स्तर पर खाद्य सामग्री, दवाइयों और अस्थायी आश्रयों की भारी कमी है। ऐसे में नेताओं के गैर-जिम्मेदाराना बयान लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसे हैं।

मानवीय संकट गहराया, राहत कार्य धीमे
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हजारों परिवार बेघर हो चुके हैं और राहत कैंपों में जगह की भारी कमी है। बारिश और बाढ़ से खड़ी फसलें बर्बाद होने के कारण खाद्य संकट की आशंका भी बढ़ रही है। स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ने से बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं मदद के लिए हाथ बढ़ा रही हैं, लेकिन स्थानीय नेतृत्व के विवादित बयान लोगों का भरोसा कमजोर कर रहे हैं।