रील नहीं, रियल IPS: सिमाला प्रसाद ने वर्दी और सिनेमा दोनों में बनाई पहचान
IPS अधिकारी और अभिनेत्री सिमाला प्रसाद की प्रेरणादायक कहानी, जो प्रशासनिक सेवा और सिनेमा की दुनिया को एक साथ साधती हैं। जानिए ‘द नर्मदा स्टोरी’ और उनके असाधारण सफर के बारे में।
मनोरंजन की दुनिया को आमतौर पर चकाचौंध, लोकप्रियता और स्टारडम के चश्मे से देखा जाता है, लेकिन कुछ शख्सियतें ऐसी होती हैं जो इस सीमित सोच को तोड़ देती हैं। सिमाला प्रसाद उन्हीं चुनिंदा लोगों में से हैं, जिन्होंने यह साबित किया है कि प्रतिभा किसी एक दायरे की मोहताज नहीं होती। पर्दे पर वे जितनी प्रभावशाली दिखाई देती हैं, वास्तविक जीवन में उतनी ही सख्त, जिम्मेदार और संवेदनशील पुलिस अधिकारी भी हैं। अभिनय और प्रशासन, दो बिल्कुल अलग रास्तों को एक साथ साधकर उन्होंने एक ऐसी मिसाल कायम की है, जो युवाओं को यह भरोसा दिलाती है कि अगर संकल्प मजबूत हो तो एक से ज्यादा सपनों को जीना संभव है।
जहां फिल्मों में पुलिस अधिकारी का किरदार निभाने के लिए अभिनेत्रियों को वर्कशॉप और ट्रेनिंग लेनी पड़ती है, वहीं सिमाला प्रसाद के लिए पुलिस की वर्दी कोई अभिनय नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की सच्चाई है। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अपराध पर नियंत्रण और आम जनता की सुरक्षा जैसे गंभीर दायित्व निभाते हुए भी उन्होंने सिनेमा से अपने रिश्ते को जीवित रखा। उनकी यह दोहरी भूमिका उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती है, क्योंकि उनके अभिनय में अनुभव की सच्चाई झलकती है।
सादगी में छुपी असरदार अदाकारी
सिमाला ने अभिनय की दुनिया में कदम साल 2016 में फिल्म ‘अलिफ’ से रखा। यह फिल्म भले ही व्यावसायिक सिनेमा की चकाचौंध से दूर रही हो, लेकिन उनके अभिनय ने दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान जरूर खींचा। इसके बाद 2019 में आई फिल्म ‘नक्काश’ में उन्होंने कुमुद मिश्रा, शारिब हाशमी और राजेश शर्मा जैसे अनुभवी कलाकारों के साथ काम किया। उनकी एक्टिंग की सबसे बड़ी खूबी यह है कि उसमें दिखावा नहीं, बल्कि गहराई, ठहराव और संवेदना दिखाई देती है। उनके किरदार शोर नहीं मचाते, बल्कि धीरे-धीरे दर्शक के भीतर उतरते हैं।
रील और रियल का संगम ‘द नर्मदा स्टोरी’ में
इन दिनों सिमाला प्रसाद अपनी आगामी फिल्म ‘द नर्मदा स्टोरी’ को लेकर चर्चा में हैं। यह फिल्म एक पुलिस ड्रामा थ्रिलर है, जो सच्ची घटनाओं से प्रेरित बताई जा रही है। फिल्म में वे एक ईमानदार और निडर जांच अधिकारी की भूमिका में नज़र आएंगी, जो काफी हद तक उनके वास्तविक जीवन से मेल खाती है। रघुबीर यादव, मुकेश तिवारी और अंजलि पाटिल जैसे दमदार कलाकारों के साथ उनकी केमिस्ट्री फिल्म को और मजबूत बनाती है। फिल्म का निर्देशन जैगम इमाम कर रहे हैं, जो पहले भी सिमाला के साथ काम कर चुके हैं। मध्य प्रदेश की पृष्ठभूमि में शूट की गई इस फिल्म में पुलिस सिस्टम की वास्तविकताओं को बिना सजावट के दिखाने की कोशिश की गई है।
प्रशासन और साहित्य की विरासत
सिमाला प्रसाद का जन्म भोपाल में हुआ और उनका पारिवारिक वातावरण शिक्षा, प्रशासन और साहित्य से गहराई से जुड़ा रहा है। उनके पिता डॉ. भागीरथ प्रसाद 1975 बैच के IAS अधिकारी रहे हैं और सांसद के रूप में भी देश की सेवा कर चुके हैं। वे दो विश्वविद्यालयों के कुलपति भी रह चुके हैं। वहीं उनकी मां मेहरुन्निसा परवेज एक प्रतिष्ठित लेखिका हैं, जिन्हें साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्म श्री सम्मान मिला है। इस पारिवारिक विरासत ने सिमाला के व्यक्तित्व को गहराई और संतुलन दिया।
बिना कोचिंग, पहले प्रयास में IPS
करियर की शुरुआत में सिमाला ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर डीएसपी के रूप में सेवा शुरू की। लेकिन उनका सपना यहीं तक सीमित नहीं था। बिना किसी कोचिंग के उन्होंने वर्ष 2010 में अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 51 हासिल कर भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुईं। यह उपलब्धि उनके आत्मविश्वास, अनुशासन और मेहनत की मिसाल है।
एक पहचान नहीं, एक संपूर्ण व्यक्तित्व
सिमाला प्रसाद सिर्फ एक अफसर या अभिनेत्री तक सीमित नहीं हैं। वे एक संवेदनशील कलाकार भी हैं, जो नृत्य, रंगमंच और सांस्कृतिक गतिविधियों के ज़रिए अपनी रचनात्मकता को अभिव्यक्त करती रही हैं। उनका मानना है कि इंसान को खुद को एक पहचान में बांधकर नहीं रखना चाहिए। जीवन में जो भी शौक और जुनून हों, उन्हें पूरी ईमानदारी से जीना चाहिए। शायद यही सोच उन्हें भीड़ से अलग बनाती है और उनकी कहानी को प्रेरणादायक बनाती है।


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