धोनी को मद्रास हाईकोर्ट का आदेश, मानहानि केस में 10 लाख रुपये जमा करने होंगे

मद्रास हाईकोर्ट ने महेंद्र सिंह धोनी को 100 करोड़ की मानहानि याचिका से जुड़े मामले में 10 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया है। यह राशि सीडी कंटेंट के ट्रांसक्रिप्शन और ट्रांसलेशन खर्च के लिए तय की गई है। जानिए पूरा मामला।

धोनी को मद्रास हाईकोर्ट का आदेश, मानहानि केस में 10 लाख रुपये जमा करने होंगे
MS Dhoni

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को मद्रास हाईकोर्ट से जुड़े एक अहम मानहानि मामले में अंतरिम निर्देश मिला है। अदालत ने उन्हें 10 लाख रुपये जमा करने का आदेश दिया है। यह राशि मुकदमे में प्रस्तुत एक सीडी के कंटेंट को लिखित रूप में उतारने और उसका अनुवाद कराने के खर्च के लिए तय की गई है। यह मामला उस मानहानि याचिका से जुड़ा है जिसमें धोनी ने रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार के खिलाफ 100 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है।

आईपीएल सट्टेबाजी विवाद से जुड़ा आरोप
धोनी का आरोप है कि संपत कुमार ने उन्हें 2013 के आईपीएल सट्टेबाजी प्रकरण से जोड़ा, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा। इस मामले में न्यायमूर्ति आर.एन. मंजुला ने 11 फरवरी को अंतरिम आदेश पारित करते हुए ट्रांसक्रिप्शन और ट्रांसलेशन की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए। अदालत के अनुसार, रिकॉर्ड में मौजूद सीडी की सामग्री को प्रमाण के तौर पर व्यवस्थित करना जरूरी है, ताकि आगे की सुनवाई सुचारु रूप से हो सके।

ट्रांसक्रिप्शन का काम बताया गया समयसाध्य
अदालत ने अपने पूर्व आदेश, जो 28 अक्टूबर 2025 को पारित हुआ था, का उल्लेख करते हुए बताया कि कोर्ट के आधिकारिक इंटरप्रेटर ने सीडी की सामग्री को लिखित रूप देने और उसका अनुवाद करने का काम शुरू कर दिया है। हालांकि यह कार्य काफी विस्तृत और समय लेने वाला है। न्यायालय ने कहा कि इस प्रक्रिया में एक इंटरप्रेटर और एक टाइपिस्ट को लगभग तीन से चार महीने तक लगातार काम करना होगा।

विशेष परिस्थितियों में कोर्ट ने लिया हस्तक्षेप
कार्य की व्यापकता और अतिरिक्त खर्च को देखते हुए अदालत ने कुल व्यय 10 लाख रुपये निर्धारित किया है। जस्टिस मंजुला ने स्पष्ट किया कि सामान्य परिस्थितियों में वादी को स्वयं ऐसे दस्तावेज तैयार कर अदालत में दाखिल करने होते हैं, लेकिन इस मामले की विशेष स्थिति को देखते हुए अदालत को अपने अधिकृत अनुवादक की सेवा लेनी पड़ी। इसलिए खर्च की जिम्मेदारी भी वादी, यानी धोनी, पर ही डाली गई है।

12 मार्च को अगली सुनवाई, समय सीमा तय
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि सीडी के पूरे कंटेंट का ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद मार्च 2026 के तीसरे सप्ताह तक पूरा कर लिया जाए। साथ ही धोनी को 10 लाख रुपये की राशि 12 मार्च 2026 तक मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रिलीफ फंड में जमा करनी होगी। इसी तारीख को इस मामले की अगली सुनवाई भी निर्धारित की गई है।

आगे की सुनवाई पर टिकी निगाहें
यह मामला न सिर्फ एक बड़े क्रिकेटर से जुड़ा है, बल्कि आईपीएल सट्टेबाजी विवाद की पृष्ठभूमि के कारण भी सुर्खियों में है। अब अदालत की अगली कार्यवाही पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहां ट्रांसक्रिप्शन रिपोर्ट और आगे की कानूनी दलीलों के आधार पर केस की दिशा तय होगी।