राहुल गांधी के बयानों पर लोकसभा में बवाल, विशेषाधिकार प्रस्ताव की मांग तेज
लोकसभा के बजट सत्र में राहुल गांधी के बयानों पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। गिरिराज सिंह समेत कई भाजपा नेताओं ने विशेषाधिकार प्रस्ताव की मांग की है। जानिए पूरा राजनीतिक घटनाक्रम।
संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा का माहौल इन दिनों काफी गर्म है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा भारत-अमेरिका ट्रेड डील, पूर्व सेनाध्यक्ष एमएम नरवणे की पुस्तक और एपस्टीन फाइल्स जैसे मुद्दों पर दिए गए बयानों के बाद सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। हालात ऐसे बने कि कार्यवाही को कई बार रोकना पड़ा। सत्तापक्ष ने इन बयानों को तथ्यहीन बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज की है।
गिरिराज सिंह का कड़ा हमला, प्रिविलेज मोशन की मांग
राहुल गांधी के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश में गलत जानकारी फैलाना गंभीर विषय है और इस तरह के बयान लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा के खिलाफ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के मंत्री किसानों और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट रुख रख चुके हैं, ऐसे में बिना आधार के आरोप लगाना उचित नहीं है। गिरिराज सिंह ने यह तक कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया जाना चाहिए।
निशिकांत दुबे ने उठाई सदस्यता पर सवाल
इसी मुद्दे पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी लोकसभा में प्रस्ताव रखने की बात कही। उनका आरोप है कि विपक्ष के नेता देश को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इस विषय पर विस्तृत चर्चा कराने और कड़ी कार्रवाई की मांग की। दुबे ने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए जरूरी है कि तथ्यों के साथ ही बातें रखी जाएं।
चिराग पासवान बोले– पद की गरिमा का ध्यान जरूरी
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति को अपने शब्दों की गंभीरता समझनी चाहिए। उन्होंने माना कि यदि किसी बयान से सदन की मर्यादा प्रभावित होती है, तो विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया जाना संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा है, हालांकि अंतिम निर्णय सदन की प्रक्रिया के तहत ही होगा।
स्पीकर को पत्र, बयान हटाने की उठी मांग
वहीं भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर राहुल गांधी के भाषण के कुछ अंश रिकॉर्ड से हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि सदन में बिना प्रमाण के आरोप लगाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। सांसद रवि किशन ने भी कहा कि संसद में रखे गए हर आरोप के समर्थन में ठोस साक्ष्य होने चाहिए, अन्यथा यह केवल राजनीतिक निराशा का प्रदर्शन माना जाएगा।
सदन की मर्यादा पर उठे सवाल
लोकसभा की कार्यवाही के दौरान अध्यक्षीय आसन संभाल रहे भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने भी टिप्पणी की कि विपक्ष के नेता को अपनी भाषा और शब्दों की मर्यादा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह की शैली संसदीय लोकतंत्र की भावना के अनुरूप है।
टकराव के बीच आगे की रणनीति पर नजर
बजट सत्र के बीच छिड़ा यह विवाद अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। जहां सत्तापक्ष इसे लोकतांत्रिक मर्यादा का मुद्दा बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार बता रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि विशेषाधिकार प्रस्ताव पर क्या कदम उठाया जाता है और सदन की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है।


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