SIR पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: पांच राज्यों की याचिकाओं पर एकसाथ सुनवाई, चुनाव आयोग से 1 दिसंबर तक जवाब तलब

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और बिहार में चल रहे SIR मामलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग को 1 दिसंबर तक जवाब दाखिल करने का सख्त आदेश दिया है। BLO की मौत, फॉर्म अपलोड सीमा और राजनीतिक विवादों पर भी कोर्ट ने गंभीर टिप्पणियां कीं।

SIR पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: पांच राज्यों की याचिकाओं पर एकसाथ सुनवाई, चुनाव आयोग से 1 दिसंबर तक जवाब तलब
Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने साफ कर दिया कि चुनाव आयोग को अब किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने आयोग को 1 दिसंबर 2025 तक अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया।

सभी राज्यों में SIR की एकसाथ समीक्षा
तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी और बिहार—इन सभी राज्यों से जुड़ी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने एक मंच पर सुनते हुए कहा कि प्रक्रिया में कोई भी भ्रम अथवा अव्यवस्था नहीं रहनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी दो टूक कहा कि तय समयसीमा में जवाब दाखिल न करना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सख़्त टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि तमिलनाडु से जुड़ी याचिका की सुनवाई सोमवार को अलग से की जाएगी। वहीं, केरल मामले में स्थानीय निकाय चुनाव के चलते SIR को स्थगित करने की मांग उठी है। वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने बताया कि यह याचिका पहले ही मद्रास हाईकोर्ट में लंबित है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार से अलग से स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

BLO की मौत के आरोप ने बढ़ाई गंभीरता
पश्चिम बंगाल के वकील ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान 23 BLO की मौत हुई है। इस गंभीर आरोप पर कोर्ट ने पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव कार्यालय से भी 1 दिसंबर तक विस्तृत जवाब तलब किया है। कोर्ट ने कहा कि यदि आरोप सही पाए गए, तो कार्रवाई गंभीर होगी।

बिहार का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में संबद्ध
बिहार से जुड़ी याचिका को भी इसी समूह में शामिल कर दिया गया है। दोपहर 2 बजे के बाद इस पर सुनवाई हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील रखी कि BLO को केवल 50 फॉर्म अपलोड करने की अनुमति दी गई है, जिससे प्रक्रिया बेहद धीमी हो रही है।

चुनाव आयोग बोला—कोई संकट नहीं, सब ठीक चल रहा है
चुनाव आयोग की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि राज्य चुनाव आयोगों के साथ पूरा समन्वय है और 99% मतदाताओं को फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आधे से ज्यादा फॉर्म डिजिटल किए जा चुके हैं।

'राजनीतिक दल अफरा-तफरी फैला रहे हैं' 
आयोग के वकील ने सुनवाई में कहा कि कई राजनीतिक दल SIR को लेकर अनावश्यक भ्रम फैला रहे हैं। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह देखना उसका काम है कि SIR प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से चले।

2 और 9 दिसंबर की अगली सुनवाइयों में बड़ा फैसला संभव
कोर्ट ने सुनवाई के बाद साफ कहा कि SIR से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच होगी और अगली तारीखों—2 दिसंबर (केरल) और 9 दिसंबर (बाकी राज्य)—को यह तय हो सकता है कि SIR की प्रक्रिया जारी रहेगी या इसमें कोई बदलाव किया जाएगा।