सुशील कुमार की जमानत रद्द— सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एक हफ्ते में करें सरेंडर; सागर धनखड़ मर्डर केस में बढ़ी मुश्किलें
सुप्रीम कोर्ट ने दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार की जमानत रद्द कर दी है। सागर धनखड़ मर्डर केस में हाईकोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए SC ने उन्हें एक हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया।
देश के चर्चित सागर धनखड़ मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने दो बार के ओलंपिक पदक विजेता रेसलर सुशील कुमार की जमानत रद्द कर दी है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत मिश्रा की बेंच ने 4 मार्च 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत के आदेश को खारिज करते हुए सुशील कुमार को एक हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
सागर के पिता की याचिका पर आया आदेश
यह आदेश जूनियर कुश्ती चैंपियन सागर धनखड़ के पिता की याचिका पर आया है। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के जमानत के आदेश को चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि सुशील कुमार जेल से बाहर आकर गवाहों पर दबाव डाल सकते हैं, जिससे मुकदमे की निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित होगी।
घटना की पृष्ठभूमि—4 मई 2021 की रात
यह मामला 4 मई 2021 का है, जब दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम पार्किंग एरिया में सागर धनखड़ और उनके दो दोस्तों अमित और सोनू पर हमला हुआ। पुलिस के मुताबिक, हमले की वजह संपत्ति विवाद थी और इसमें सुशील कुमार के साथ उनके कुछ साथी भी शामिल थे। इस दौरान सागर गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में ब्लंट फोर्स ट्रॉमा से उनकी मौत हो गई।
18 दिन तक पुलिस से बचते रहे सुशील कुमार
वारदात के बाद सुशील कुमार करीब 18 दिन तक पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पुलिस से बचते रहे। आखिरकार 23 मई 2021 को दिल्ली पुलिस ने उन्हें मुंडका इलाके से गिरफ्तार किया। उस समय वह एक नेशनल लेवल खिलाड़ी से ली गई स्कूटी पर कैश लेने पहुंचे थे।
गिरफ्तारी के बाद करियर पर लगा ब्रेक
गिरफ्तारी के बाद रेलवे ने सुशील कुमार को नौकरी से सस्पेंड कर दिया। अक्टूबर 2022 में दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ IPC की कई धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत आरोप तय किए। चार्जशीट में उन्हें साजिश का मास्टरमाइंड बताया गया, जो कुश्ती जगत में अपना दबदबा फिर से कायम करना चाहते थे।
सुशील कुमार का पक्ष
सुशील कुमार ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे पहले ही साढ़े तीन साल जेल में बिता चुके हैं और अब तक 222 में से सिर्फ 31 गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं। इन्हीं आधारों पर दिल्ली हाईकोर्ट ने मार्च 2024 में उन्हें जमानत दी थी।
SC का कड़ा रुख
सुप्रीम कोर्ट ने यह मानते हुए कि सुशील कुमार गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया और उन्हें एक सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया। इस फैसले से केस का ट्रायल अब तेज होने की उम्मीद है।


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