Trump का दावा: "मैंने भारत-पाकिस्तान का Nuclear War रोका" – पहलगाम हमले के बाद ट्रेड धमकी से थमा था टकराव!
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि मई 2025 में भारत-पाकिस्तान परमाणु युद्ध के करीब थे। उन्होंने ट्रेड और टैरिफ की धमकी देकर जंग रोक दी थी।
सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मई में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव इतना बढ़ गया था कि दोनों देश परमाणु युद्ध (Nuclear War) की कगार पर पहुंच गए थे। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपने कूटनीतिक दबाव और ट्रेड टैरिफ की धमकी से इस युद्ध को रुकवाया।
ट्रंप ने कहा — अगर मैंने टैरिफ और ट्रेड की धमकी नहीं दी होती, तो भारत और पाकिस्तान अब तक युद्ध कर चुके होते।
पहलगाम हमले से शुरू हुआ तनाव, ऑपरेशन सिंदूर ने बढ़ाया तापमान
ट्रंप के इस दावे की जड़ मई की शुरुआत में हुए पहलगाम आतंकी हमले से जुड़ी है। इस हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था, जिसके तहत पाकिस्तान में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया गया था।
इसके बाद पाकिस्तान ने भारत के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने उसकी सभी मिसाइलों को नाकाम कर दिया। 7 से 10 मई तक चली इस ‘छोटी जंग’ के बाद 10 मई को दोनों देश सीजफायर पर राजी हुए।
ट्रंप बोले – भारत मेरी बात मानकर रुका, पाकिस्तान को भी चेताया
ट्रंप ने इंटरव्यू में कहा कि उन्होंने दोनों देशों को चेतावनी दी थी — अगर तुम नहीं रुके, तो अमेरिका के साथ कोई भी व्यापारिक संबंध नहीं रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में जितने भी युद्ध रोके गए, उनमें से 60 प्रतिशत ट्रेड धमकी के कारण रुके।
ट्रंप ने रूस, चीन, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया पर आरोप लगाया कि वे अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्टिंग कर रहे हैं, जिससे भूकंप जैसे झटके महसूस होते हैं। उन्होंने कहा, अगर सब देश परमाणु परीक्षण कर रहे हैं, तो मैं अकेला देश नहीं रहूंगा जो ऐसा नहीं करेगा।
भारत का रुख – ट्रंप के दावे का कोई सबूत नहीं
भारत ने हमेशा से यह कहा है कि वह अपने सैन्य ऑपरेशन और कूटनीतिक फैसले खुद लेता है। नई दिल्ली ने कभी भी ट्रंप के इस दावे की पुष्टि नहीं की कि सीजफायर अमेरिका के दबाव में हुआ था। भारत का कहना है कि पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई पूरी तरह उसकी आंतरिक सुरक्षा नीति का हिस्सा थी।
अंतरराष्ट्रीय हलकों में मचा हलचल
ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। कुछ विश्लेषक इसे ट्रंप की राजनीतिक रणनीति बताते हैं, जबकि कुछ मानते हैं कि अमेरिका ने बैकचैनल डिप्लोमेसी के जरिए सचमुच युद्ध टलवाया हो सकता है। परमाणु शक्तियों से लैस दो पड़ोसी देशों के बीच इस तनाव ने एक बार फिर दक्षिण एशिया में न्यूक्लियर डिप्लोमेसी की बहस को तेज कर दिया है।


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