ईरान झुकने वाला है? जी7 नेताओं से बातचीत में ट्रंप का बड़ा दावा
जी7 देशों के साथ बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान आत्मसमर्पण की कगार पर है। वहीं ईरान ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जी7 देशों के नेताओं के साथ हुई एक बातचीत में दावा किया है कि ईरान जल्द ही आत्मसमर्पण करने की स्थिति में पहुंच सकता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह बातचीत बुधवार को स्थानीय समय के मुताबिक हुई, जिसमें जी7 के कई देशों के अधिकारी भी शामिल थे। बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए ईरान की स्थिति कमजोर पड़ती जा रही है और वह हार के करीब है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि यह बातचीत उस समय हुई जब ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने देशवासियों से अमेरिका और इजरायल के हमलों के खिलाफ डटकर मुकाबला करने की अपील की थी। उन्होंने बदले की बात करते हुए लोगों से संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया। ऐसे माहौल में ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है।
युद्ध को लेकर ट्रंप का आत्मविश्वास
बताया जा रहा है कि ट्रंप निजी तौर पर भी युद्ध के परिणाम को लेकर काफी आत्मविश्वास से भरे हुए हैं। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के इस्लामी शासन के खिलाफ अपने अभियान को और तेज कर सकता है। साथ ही उन्होंने ईरान को सतर्क रहने की चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ रिपोर्टों में भले ही अलग दावा किया जा रहा हो, लेकिन अमेरिका इस संघर्ष में बढ़त बनाए हुए है।
सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप का तीखा बयान
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि अमेरिका ईरान के शासन को सैन्य, आर्थिक और अन्य सभी मोर्चों पर कमजोर कर रहा है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की नौसेना और वायु सेना लगभग खत्म हो चुकी है और उसके हथियारों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कुछ मीडिया संस्थानों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनकी रिपोर्टों से यह गलत धारणा बनती है कि अमेरिका बढ़त में नहीं है।
ईरान का जवाबी सैन्य अभियान
दूसरी ओर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स ने दावा किया है कि उसने अपने सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के 44वें चरण की शुरुआत कर दी है। संगठन के अनुसार इस अभियान के तहत इजरायल के कब्जे वाले इलाकों में कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। साथ ही पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर भी हमले किए जाने की बात कही गई है।


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