सरकार का डिजिटल साफ-सफाई अभियान: उल्लू, ALTT, देसीफ्लिक्स समेत अश्लील कंटेंट वाले ओटीटी ऐप्स पर लगा बैन

भारत सरकार ने उल्लू, ALTT, देसीफ्लिक्स और अन्य अश्लील कंटेंट दिखाने वाले OTT ऐप्स पर बैन लगाया है। MeitY ने ये कार्रवाई नागरिकों की शिकायतों के आधार पर की। जानें पूरी रिपोर्ट।

सरकार का डिजिटल साफ-सफाई अभियान: उल्लू, ALTT, देसीफ्लिक्स समेत अश्लील कंटेंट वाले ओटीटी ऐप्स पर लगा बैन
प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत सरकार ने ओटीटी की दुनिया में एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। उल्लू, ALTT, देसीफ्लिक्स, बिग शॉट्स और कुछ अन्य ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस फैसले का उद्देश्य डिजिटल स्पेस को अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट से मुक्त करना है।

यह कदम तब उठाया गया जब इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology – MeitY) को लगातार कई नागरिकों और सामाजिक संगठनों से इन ऐप्स के खिलाफ शिकायतें मिलने लगीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि ये प्लेटफॉर्म्स खुलेआम यौन उत्तेजक और अश्लील कंटेंट का प्रसार कर रहे हैं, जिससे युवाओं और समाज पर बुरा असर पड़ रहा है।

कौन-कौन से ऐप्स पर बैन लगा?
सरकार की इस कार्रवाई की चपेट में आने वाले प्रमुख ऐप्स हैं:
- Ullu App
- ALTT (ALTBalaji का नया संस्करण)
- DesiFlix
- BigShots
- PrimePlay, Nuefliks, HotShots आदि।

इनमें से कई प्लेटफॉर्म Paywall के जरिए एक्सप्लिसिट कंटेंट बेच रहे थे और सोशल मीडिया पर इन्हें बड़े स्तर पर प्रमोट भी किया जा रहा था।

क्या था सरकार का तर्क?
सरकार का कहना है कि भारत की डिजिटल सीमाएं संविधान, संस्कृति और नैतिक मूल्यों के अधीन हैं। OTT प्लेटफॉर्म को कोई छूट नहीं दी जा सकती जो समाज को गंदगी की ओर ले जाए।

MeitY के सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई आईटी अधिनियम 2000 की धाराओं के अंतर्गत की गई है। इसके साथ ही यह भी साफ किया गया है कि सरकार डिजिटल माध्यमों की आज़ादी के खिलाफ नहीं, लेकिन दुरुपयोग के खिलाफ सख्त है।

क्यों आई इतनी शिकायतें?
इन ऐप्स पर आरोप था कि वे बिना किसी एज रेस्ट्रिक्शन के अश्लील वीडियो दिखाते थे। समाज में नैतिक गिरावट को बढ़ावा दे रहे थे। OTT कंटेंट के नाम पर पोर्नोग्राफ़ी को प्रमोट कर रहे थे। बच्चों और किशोरों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे थे।

आगे की रणनीति क्या हो सकती है?
सूत्रों की मानें तो सरकार जल्द ही ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए एक ठोस और व्यापक गाइडलाइन लाने पर विचार कर रही है। संभावना है कि भविष्य में ऐसे सभी ऐप्स को पूर्व सेंसरशिप, एज-वेरिफिकेशन, कंटेंट टैगिंग, और प्रकाशन अनुमति जैसे प्रावधानों से गुजरना होगा।