हम कोई दलाल देश नहीं… पाकिस्तान की मध्यस्थता पर जयशंकर का करारा जवाब, अमेरिका पर भी निशाना
पश्चिम एशिया संकट पर केंद्र की सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर का पाकिस्तान पर कड़ा बयान, ऊर्जा सुरक्षा और ईरान-इजराइल तनाव पर सरकार ने दिया बड़ा अपडेट।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को सभी दलों की एक अहम बैठक बुलाई, जिसकी अगुवाई रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की. बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर और विदेश सचिव ने विस्तार से जानकारी देते हुए हॉर्मुज जलडमरूमध्य और भारत की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर प्रस्तुति दी. करीब डेढ़ घंटे चली इस बैठक में ईरान से जुड़े हालात, युद्ध की स्थिति और देश की ऊर्जा जरूरतों पर गंभीर चर्चा हुई.
पाकिस्तान की भूमिका पर भारत का साफ इनकार
बैठक के दौरान जब पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थता को लेकर सवाल उठाया गया, तो विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत किसी तीसरे देश के जरिए बातचीत कराने वाला देश नहीं है. उन्होंने दो टूक कहा कि भारत खुद सक्षम है और किसी तरह की दलाली की जरूरत नहीं है. साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका लंबे समय से पाकिस्तान का इस्तेमाल मध्यस्थता के लिए करता रहा है.
सत्ता और विपक्ष आमने-सामने
इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे. वहीं विपक्ष की ओर से समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, जनता दल यूनाइटेड और माकपा समेत कई दलों के नेताओं ने भी अपने सवाल रखे. सपा नेता धर्मेंद्र यादव और कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक ने खास तौर पर विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा.
ईरान पर हमले को लेकर सवाल-जवाब
विपक्ष ने अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले को लेकर भी सवाल उठाए. इसके जवाब में विदेश सचिव ने कहा कि ईरान ने परमाणु कार्यक्रम को लेकर जो आश्वासन दिया था, वह उससे आगे बढ़ता दिख रहा था, जिसके चलते यह कार्रवाई हुई. इस पर भी विपक्ष ने अपनी चिंता जताई और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर सवाल किए.
कोविड और कूटनीति पर भी बहस
बैठक में कोविड को लेकर प्रधानमंत्री के बयान पर भी विपक्ष ने चिंता जताई और कहा कि इससे लोगों में डर का माहौल बन सकता है. इस पर सरकार ने कहा कि ऐसी कोई मंशा नहीं है और अगर कहीं भ्रम की स्थिति है तो उसकी जांच की जाएगी. साथ ही एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने ईरान के राष्ट्रपति की मौत पर शोक संदेश में देरी और ईरानी जहाजों को भारत में जगह न देने जैसे मुद्दे भी उठाए.
इजराइल दौरा और शोक संदेश पर विवाद
प्रधानमंत्री के इजराइल दौरे के समय को लेकर भी विपक्ष ने सवाल खड़े किए. वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता के निधन पर शोक व्यक्त करने में हुई देरी को लेकर विदेश सचिव ने सफाई दी कि नई दिल्ली स्थित ईरान दूतावास ने कुछ दिन बाद ही औपचारिक रूप से अपने द्वार खोले, जिसके बाद ही शोक संदेश दर्ज किया गया.
ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का भरोसा
सरकार ने इस पूरे संकट के बीच देश को आश्वस्त करते हुए कहा कि ऊर्जा आपूर्ति को लेकर कोई खतरा नहीं है. प्रस्तुति में बताया गया कि आने वाले दिनों में कई जहाज भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने वाले हैं और तेल-गैस की अग्रिम बुकिंग कर ली गई है. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि घबराने की जरूरत नहीं है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है.
निकासी अभियान और कूटनीतिक सक्रियता
सरकार ने यह भी जानकारी दी कि अब तक चार लाख पच्चीस हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है. साथ ही विभिन्न देशों के साथ संपर्क बढ़ाकर भारत ने अपने हितों को सुरक्षित रखने की दिशा में सक्रिय कदम उठाए हैं, जिसे कूटनीतिक सफलता के तौर पर भी देखा जा रहा है.


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