अजमेर शरीफ दरगाह के खातों का नहीं होगा कैग ऑडिट, दिल्ली हाई कोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक

जमेर शरीफ दरगाह, जो सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की मजार है, भारत में एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। इसके प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर कानूनी विवाद होते रहे हैं।

अजमेर शरीफ दरगाह के खातों का नहीं होगा कैग ऑडिट, दिल्ली हाई कोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक
Ajmer Sharif Dargah (File photo)

दिल्ली हाई कोर्ट ने अजमेर शरीफ दरगाह के खातों के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा प्रस्तावित ऑडिट पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह रोक अजमेर स्थित दरगाह शरीफ से संबंधित दो पंजीकृत संस्थाओं द्वारा दायर याचिकाओं के आधार पर लगाई गई। यह याचिका अंजुमन मोइनिया फखरिया चिश्तिया खुद्दाम ख्वाजा साहब सैयदजादगान दरगाह शरीफ और एक अन्य पंजीकृत सोसायटी द्वारा दायर की गई। याचिकाकर्ताओं ने कैग ऑडिट के औचित्य और प्रक्रिया पर सवाल उठाए और दावा किया कि यह दरगाह के प्रबंधन के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप है।

न्यायमूर्ति सचिन दत्ता का आदेश
न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं के पक्ष को सुनने के बाद कैग ऑडिट पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि इस मामले की अगली सुनवाई में संबंधित पक्ष अपने-अपने तर्क प्रस्तुत करें। दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार, राजस्थान सरकार, और कैग को नोटिस जारी करते हुए इस मुद्दे पर उनके उत्तर मांगे हैं। इस मामले की अगली सुनवाई आगामी कुछ हफ्तों में निर्धारित की जाएगी।

यह मामला धार्मिक संस्थानों के वित्तीय प्रबंधन और सरकारी ऑडिट के अधिकार क्षेत्र के संतुलन से जुड़ा है। इस पर अदालत का अंतिम निर्णय अन्य धार्मिक संस्थानों के लिए भी एक मिसाल स्थापित कर सकता है। अजमेर शरीफ दरगाह, जो सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की मजार है, भारत में एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। इसके प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर कानूनी विवाद होते रहे हैं।