देवता सबके हैं, फंड भी सबके लिए हो – सुप्रीम कोर्ट का बांके बिहारी मंदिर कमेटी से सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन विवाद में कहा—निजी मंदिर सही, पर देवता सबके हैं। मंदिर फंड से विकास सही, लेकिन निगरानी जरूरी।
वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला गर्मा गया है। मंदिर मैनेजमेंट कमेटी ने राज्य सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश और सुप्रीम कोर्ट के 15 मई 2025 के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें सरकार को मंदिर फंड से बांके बिहारी कॉरिडोर के निर्माण की अनुमति दी गई थी।
याचिकाकर्ता के अनुसार, मंदिर एक निजी धार्मिक स्थल है, जिसे वर्षों से गोस्वामी परिवार प्रबंधित करता आया है। अब सरकार बिना अधिकार इसमें हस्तक्षेप कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मंदिर कमेटी से तीखे सवाल किए, मंदिर निजी हो सकता है, लेकिन देवता सार्वजनिक हैं। करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। फिर मंदिर का फंड श्रद्धालुओं की सुविधा में क्यों नहीं लगे? आप क्यों चाहते हैं कि मंदिर का सारा फंड सिर्फ आपके पास ही रहे? कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर याचिकाकर्ता को राज्य सरकार के अध्यादेश से आपत्ति है तो उन्हें हाई कोर्ट में चुनौती देनी चाहिए।
मंदिर पक्ष की दलीलें
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा, मंदिर में दो गुटों के बीच धार्मिक गतिविधियों को लेकर पहले से विवाद था। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जाकर आदेश लिया, जिसमें मंदिर फंड से कॉरिडोर निर्माण की इजाजत दी गई, वो भी बिना हमारी बात सुने। सरकार को अगर विकास करना है तो वो अपने पैसों से भूमि अधिग्रहण करे, मंदिर के पैसे का इस्तेमाल न करे।
सुप्रीम कोर्ट के संभावित कदम
करीब 50 मिनट की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इशारा किया कि 15 मई 2025 का आदेश वापस लिया जा सकता है। मंदिर के प्रबंधन की निगरानी के लिए एक सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र कमेटी गठित की जाएगी। इस कमेटी में जिलाधिकारी (DM) और ASI (आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) के प्रतिनिधि को भी शामिल किया जाएगा। कोर्ट ने कहा, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना जरूरी है और इसके लिए बुनियादी सुविधाओं का विकास होना चाहिए।


आँखें न्यूज़ 24 




