UNICEF के सहयोग से बिहार में चार दिवसीय Adolescent Life Skill Training सम्पन्न, बालगृहों में होगा प्रभावी क्रियान्वयन

UNICEF सहयोग से बिहार में चार दिवसीय Adolescent Life Skill Training सम्पन्न, 38 जिलों के प्रतिभागियों ने जीवन कौशल मॉड्यूल को लागू करने की तैयारी की।

UNICEF के सहयोग से बिहार में चार दिवसीय Adolescent Life Skill Training सम्पन्न, बालगृहों में होगा प्रभावी क्रियान्वयन

चार दिनों तक चले किशोर–किशोरी जीवन कौशल प्रशिक्षण का आज महिला एवं बाल विकास निगम, बिहार ने सफल समापन कर दिया। यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण में 9 से 12 दिसंबर 2025 तक राज्य के सभी 38 जिलों से आए केस वर्कर्स, काउंसलर्स और परिवीक्षा अधिकारियों ने भागीदारी दर्ज की। अंतिम दिन प्रतिभागियों ने मॉक सेशन, कार्ययोजना निर्माण और पोस्ट-असेसमेंट जैसे व्यावहारिक अभ्यास पूरे किए। समापन के दौरान यह उम्मीद जताई गई कि जीवन कौशल पर आधारित गतिविधियों का उपयोग अब बालगृहों में और अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

दूसरे दिन केंद्र में रहा Self Awareness व Goal Setting
प्रशिक्षण के दूसरे दिन 10 दिसंबर को सत्र की शुरुआत री-कैप के साथ हुई, जिसके बाद Self Awareness, लक्ष्य निर्धारण, किशोर स्वास्थ्य और जोखिम–निरोधक विषयों पर आकर्षक और इंटरैक्टिव चर्चा हुई। दिन का अंत एक जीवन कौशल आधारित समूह गतिविधि के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने वास्तविक परिस्थितियों को समझते हुए अपनी सीख को साझा किया।

मानसिक स्वास्थ्य और जेंडर इक्वालिटी पर गहन सत्र
11 दिसंबर को तीसरे दिन की शुरुआत लिंग समानता और मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन विमर्श के साथ हुई। इसके बाद प्रतिभागियों ने फेसिलिटेशन स्किल्स को समझा और वास्तविक प्रशिक्षण की झलक देने के लिए दोपहर में मॉक सेशन भी प्रस्तुत किए।

अंतिम दिन फॉलो-अप प्लानिंग और फीडबैक से हुई समाप्ति
12 दिसंबर को प्रशिक्षण के अंतिम दिन प्रतिभागियों ने फॉलो-अप प्लानिंग, मॉक सेशन और पोस्ट-असेसमेंट गतिविधियों में हिस्सा लिया। समापन समारोह फीडबैक साझा करने और धन्यवाद ज्ञापन के साथ पूरा हुआ। सभी प्रतिभागियों ने इस मॉड्यूल को बालगृहों में लागू करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।

जीवन कौशल ढांचे को सशक्त बनाने का लक्ष्य
इस पूरे प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि जीवन कौशल ढांचे को न केवल समझा जाए बल्कि इसे बालगृहों में किशोर-किशोरियों के विकास के लिए प्रभावी रूप से लागू भी किया जाए। यह पहल राज्य में बाल संरक्षण तंत्र को और मजबूती देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।