बिहार में कानून व्यवस्था पर भड़के चिराग पासवान: कहा – अपराध बेकाबू, मुझे दुख है ऐसी सरकार का समर्थन कर रहा हूं

बिहार में बढ़ते अपराधों पर चिराग पासवान ने नीतीश सरकार पर निशाना साधा। बोले – मुझे दुख है कि मैं ऐसी सरकार का समर्थन कर रहा हूं।

बिहार में कानून व्यवस्था पर भड़के चिराग पासवान: कहा – अपराध बेकाबू, मुझे दुख है ऐसी सरकार का समर्थन कर रहा हूं
Chirag Paswan and Nitish kumar

बिहार में दो महीनों बाद संभावित विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राज्य की राजनीति में जबरदस्त उबाल देखने को मिल रहा है। एक तरफ सत्तारूढ़ गठबंधन अपनी तैयारियों में जुटा है, वहीं दूसरी ओर उसके सहयोगी ही अब सरकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिहार में बढ़ती अपराध की घटनाओं को लेकर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा – "मुझे दुख है कि मैं ऐसी सरकार का समर्थन कर रहा हूं, जहां अपराध पूरी तरह से बेकाबू हो चुके हैं।"

बिहार में क्राइम ग्राफ तेजी से ऊपर, 1 महीने में 50 से अधिक हत्याएं
चिराग पासवान का बयान ऐसे समय में आया है, जब राज्य में पिछले एक महीने में 50 से अधिक हत्या के मामले सामने आए हैं। हालात इतने भयावह हो गए हैं कि दिनदहाड़े फायरिंग, अस्पताल में मर्डर, और शहरों में खुलेआम हिंसा जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं। इन घटनाओं ने न केवल जनता को डरा दिया है, बल्कि सत्ता में शामिल सहयोगी दलों को भी असहज कर दिया है।

चिराग पासवान ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने साफ कहा – प्रशासन अपराधियों के सामने पूरी तरह नतमस्तक हो चुका है। ये बेहद दुखद है कि मैं ऐसी सरकार का समर्थन कर रहा हूं। अगर यही चलता रहा, तो स्थिति और भयावह हो जाएगी – बल्कि हो ही चुकी है।

उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई यह कहता है कि यह सब चुनावी माहौल का असर है, या सरकार को बदनाम करने की साजिश है, तो वह मान सकते हैं — लेकिन तब भी प्रशासन की जिम्मेदारी से इंकार नहीं किया जा सकता।

क्या बिहार सरकार से दूर हो रही है चिराग की पार्टी?
चिराग पासवान का ये बयान कोई पहला मौका नहीं है जब उन्होंने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हों। इससे पहले भी उनकी पार्टी के कई सांसदों ने बिहार में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर चिंता जाहिर की थी। कुछ नेताओं ने तो यहां तक कह दिया था कि "बिहार सरकार को यूपी की योगी सरकार से सबक लेना चाहिए।"

चुनावी रणनीति या सच्चा विरोध?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिराग पासवान के इन बयानों के दो पहलू हैं –
- जनता के असंतोष को स्वर देना
- चुनाव से पहले खुद को स्वतंत्र और मजबूत नेता के तौर पर पेश करना

अब देखना होगा कि चिराग पासवान की यह नाराजगी आने वाले चुनाव में गठबंधन की एकता को कितना प्रभावित करती है।