Khan Sir Hospital Initiative: 7 रुपये में ब्लड टेस्ट से 1000 रुपये में फुल बॉडी जांच, पटना से शुरू हो रही है हेल्थ क्रांति
Khan Sir Hospital Initiative: पटना में खान सर खोल रहे हैं सस्ते अस्पताल, जहां ₹7 में ब्लड टेस्ट और ₹1000 में फुल बॉडी जांच होगी। जानिए पूरी योजना।
आज के समय में देश में अगर कोई चीज सबसे ज्यादा महंगी होती जा रही है, तो वह है शिक्षा और स्वास्थ्य। ऐसे दौर में जब प्राइवेट अस्पतालों के नाम से ही आम आदमी की जेब कांप जाती है, पटना के मशहूर शिक्षाविद् खान सर ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो, तो प्राइवेट अस्पताल में भी बेहद सस्ते और सम्मानजनक इलाज की व्यवस्था की जा सकती है।
खान सर ने पटना से एक ऐसी मुहिम की शुरुआत की है, जिसके तहत वे पांच विशेष अस्पताल खोलने जा रहे हैं। इन अस्पतालों में जांच और इलाज की दरें इतनी कम होंगी कि आम आदमी भी बिना डर के इलाज करवा सकेगा। ब्लड टेस्ट महज 7 रुपये, ECG 25 रुपये, एक्स-रे 35 रुपये और पूरी बॉडी की जांच सिर्फ 1000 रुपये में की जाएगी। यह दरें मौजूदा मेडिकल सिस्टम के लिए किसी चौंकाने वाले बदलाव से कम नहीं हैं।
समाज के प्रति जिम्मेदारी से जन्मी सोच
ईटीवी भारत से बातचीत में खान सर ने कहा कि एक मिडिल क्लास इंसान अस्पताल में इलाज के दौरान सबसे ज्यादा मानसिक और आर्थिक पीड़ा झेलता है। इसी सच्चाई को देखते हुए उन्होंने अस्पताल खोलने का फैसला किया। उनका मानना है कि इंसान को समाज का कर्ज चुकाना चाहिए। उन्होंने अपने दादाजी की सीख को याद करते हुए कहा कि कमाई पर नहीं, बल्कि समाज को कितना लौटाया, इस पर गर्व होना चाहिए।
बीमारी पर नहीं, इंसानियत पर भरोसा
खान सर का कहना है कि जो व्यक्ति जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा हो, उससे मुनाफा कमाना अमानवीय है। उनके मुताबिक, टैक्स और कमाई शौक की चीजों पर होनी चाहिए, न कि वेंटिलेटर पर पड़े मरीजों से। उन्होंने सवाल उठाया कि जो इंसान मरने के कगार पर हो, उससे पैसे कैसे लिए जा सकते हैं।
इलाज के नाम पर उजड़ता मिडिल क्लास
उन्होंने बताया कि आज के समय में ICU में एक दिन का खर्च 50 से 70 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। अगर कोई मरीज 10 दिन भर्ती रहा, तो मिडिल क्लास परिवार पर लाखों का बोझ आ जाता है। इस चक्कर में लोग कर्ज में डूब जाते हैं, गहने और जमीन बेचने तक की नौबत आ जाती है, वह भी आधे दाम पर। यह दर्द उन्होंने बहुत करीब से देखा है।
लोगों की पीड़ा से जन्मा संकल्प
खान सर बताते हैं कि पटना में लोग उनसे अक्सर अच्छे डॉक्टर की सिफारिश मांगते थे और अपनी परेशानियां साझा करते थे। कई लोगों ने उन्हें बताया कि कैसे अस्पतालों के चक्कर लगाकर उनकी पूरी जमा-पूंजी खत्म हो गई। इसी अनुभव ने उन्हें खुद आगे बढ़कर समाधान बनने की प्रेरणा दी।
मांझी की धरती से निकली जिद
उन्होंने कहा कि वह मांझी जी की धरती से आते हैं, जिन्होंने पहाड़ काट दिया था, इसलिए वह केवल शिकायत करने के बजाय खुद रास्ता बनाने में विश्वास रखते हैं। इसी सोच के तहत उन्होंने एक नहीं, बल्कि अलग-अलग बीमारियों के लिए स्पेशलाइज्ड अस्पताल खोलने की योजना बनाई है।
इलाज के साथ रिसर्च पर भी फोकस
खान सर के अनुसार, न्यूरो, हार्ट, कैंसर और किडनी के लिए अलग-अलग अस्पताल होंगे, जबकि जांच के लिए एक अलग सेंटर बनाया जा रहा है। इससे मरीजों को सही जगह पर सही इलाज मिलेगा और भीड़ भी कम होगी। साथ ही इलाज के साथ-साथ बीमारी पर रिसर्च और केस स्टडी भी की जाएगी, ताकि यह समझा जा सके कि किसी इलाके या उम्र वर्ग में बीमारी ज्यादा क्यों फैल रही है।
AI से सस्ती और सटीक जांच
इस पूरी व्यवस्था में AI टेक्नोलॉजी की भी अहम भूमिका होगी। खान सर बताते हैं कि अब ज्यादातर मेडिकल मशीनों में AI आ चुका है, जिससे ह्यूमन एरर की संभावना कम हो जाती है। उदाहरण के तौर पर MRI जांच जो आमतौर पर 7 हजार रुपये में होती है, उसमें कई बार बीमारी नहीं निकलती और मरीज को लगता है कि उसका पैसा बेकार गया।
पहले जरूरत, फिर महंगी जांच
उनके अस्पताल में AI आधारित शुरुआती जांच ₹1000 में होगी। अगर उसमें कोई गंभीर समस्या नहीं दिखी, तो महंगी MRI की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। और अगर बीमारी सामने आती है, तो डॉक्टरों की पूरी टीम हर एंगल से जांच करेगी, जिसका चार्ज मात्र ₹1800 होगा।
डॉक्टर बनाम सिस्टम की सोच
खान सर कहते हैं कि इस मिशन में उन्हें डॉक्टर मित्रों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। उनका मानना है कि व्यक्तिगत तौर पर डॉक्टर बुरे नहीं होते, लेकिन जब अस्पताल को बिजनेस की तरह चलाया जाता है, तब समस्याएं शुरू होती हैं। वह अमीर और गरीब के इलाज में फर्क खत्म करना चाहते हैं।
अमीरी नहीं, बीमारी देखी जाएगी
उनका साफ कहना है कि जो व्यक्ति लग्जरी गाड़ी से अस्पताल आता है, उससे ज्यादा फीस ली जा सकती है, लेकिन जो ऑटो या रिक्शा से आता है, उस पर हजारों का बोझ डालना अन्याय है। इलाज सबका हक है, हैसियत देखकर नहीं होना चाहिए।
राजनीति नहीं, समाज सेवा प्राथमिकता
खान सर ने स्पष्ट किया कि उनका राजनीति में उतरने का कोई इरादा नहीं है। वह राजनीति पढ़ाते जरूर हैं, लेकिन करना नहीं चाहते। उनका पूरा फोकस शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार पर है।
मां की सीख से तय हो रहे रेट
उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता इस पहल से बेहद खुश हैं। खास बात यह है कि अस्पताल की जांच दरें तय करने में उनकी मां की बड़ी भूमिका है। मां अक्सर कहती हैं कि रेट और कम करो, ताकि लोगों को परेशानी न हो।
शिक्षा के बाद अब स्वास्थ्य में बदलाव
खान सर का असली नाम फैजल खान है। उनका जन्म 1993 में गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से BSc और MSc करने वाले खान सर आज देश के सबसे लोकप्रिय शिक्षकों में गिने जाते हैं। पटना स्थित Khan GS Research Centre और YouTube पर लाखों छात्रों तक उनकी पहुंच है। सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बाद अब उन्होंने स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी नई मिसाल कायम करने की ठानी है।


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