चैत्र नवरात्रि: 72 साल बाद बना दुर्लभ संयोग, एक ही दिन अमावस्या स्नान-दान और मां दुर्गा का आगमन

चैत्र नवरात्रि 2026 में 72 साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब अमावस्या और प्रतिपदा एक ही दिन पड़ रही है। जानिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूरी पूजा विधि।

चैत्र नवरात्रि: 72 साल बाद बना दुर्लभ संयोग, एक ही दिन अमावस्या स्नान-दान और मां दुर्गा का आगमन

चैत्र नवरात्रि इस बार खास संयोग लेकर आ रही है, जो करीब 72 साल बाद देखने को मिल रहा है। 19 मार्च 2026 को अमावस्या और प्रतिपदा तिथि एक ही दिन पड़ रही है, जिससे धार्मिक दृष्टि से इस दिन का महत्व और बढ़ गया है। सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि रहने के कारण लोग सुबह स्नान-दान और पितरों से जुड़े कर्मकांड करेंगे, वहीं इसी दिन मां दुर्गा का आगमन भी होगा। यह संयोग भक्तों के लिए बेहद शुभ और पुण्यदायी माना जा रहा है।

कलश स्थापना का सटीक समय
इस खास दिन कलश स्थापना यानी घटस्थापना का शुभ समय भी तय किया गया है। सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 9 बजकर 44 मिनट तक कलश स्थापना का उत्तम मुहूर्त रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में भी स्थापना की जा सकती है, जो सुबह 11 बजकर 20 मिनट से दोपहर 12 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। प्रतिपदा तिथि 19 मार्च की सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 20 मार्च की सुबह 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद द्वितीया तिथि प्रारंभ होगी।

घटस्थापना की सही दिशा और तैयारी
घटस्थापना के लिए घर में उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है। यदि यह संभव न हो तो घर के मंदिर के पास भी कलश स्थापित किया जा सकता है। स्थापना के लिए पहले एक पात्र में शुद्ध मिट्टी भरकर उसमें जौ बोए जाते हैं, जो समृद्धि और उन्नति का प्रतीक माने जाते हैं। इसके बाद तांबे या मिट्टी का कलश लेकर उसमें जल, गंगाजल, सुपारी, सिक्का और अक्षत डाले जाते हैं और उसके मुख पर कलावा बांधा जाता है।

पूजा विधि और संकल्प का महत्व
कलश के ऊपर आम के पांच पत्ते रखे जाते हैं और उसके ऊपर नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर स्थापित किया जाता है। इसके बाद विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा की जाती है और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूरे नौ दिनों तक माता के साथ-साथ कलश की भी श्रद्धा से पूजा करना बेहद जरूरी माना जाता है।