कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय और शिप्रा बने जीवनसाथी, गुलाबी नगरी में रचा गया आध्यात्मिक विवाह का इतिहास

जयपुर में वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने हरियाणा की शिप्रा से भव्य और आध्यात्मिक माहौल में विवाह किया। धीरेंद्र शास्त्री और कुमार विश्वास समेत कई बड़ी हस्तियां बनीं इस खास पल की गवाह।

कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय और शिप्रा बने जीवनसाथी, गुलाबी नगरी में रचा गया आध्यात्मिक विवाह का इतिहास
जयपुर के ताज आमेर होटल में सजे विवाह मंडप में कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय और दुल्हन शिप्रा

राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर रविवार को एक बेहद खास और आध्यात्मिक रंग में रंगी नजर आई, जब वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय जीवन के नए अध्याय में प्रवेश करते हुए हरियाणा की शिप्रा के साथ विवाह बंधन में बंध गए। यह पावन विवाह परिवारजनों, साधु-संतों और करीबियों की मौजूदगी में पारंपरिक वैदिक विधि से संपन्न हुआ। हल्दी की खुशबू, शहनाइयों की मधुर धुन और रिश्तों की आत्मीयता ने पूरे माहौल को बेहद भावुक और खास बना दिया। जयपुर का ताज आमेर होटल रोशनी और भव्य सजावट से ऐसा जगमगा उठा जैसे कोई राजसी उत्सव हो।

संतों, कवियों और सितारों की मौजूदगी से बढ़ी शादी की रौनक
इस विवाह समारोह में देश की कई नामी हस्तियां भी शामिल हुईं। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री, कवि कुमार विश्वास समेत कई प्रसिद्ध धार्मिक हस्तियों और कुछ बॉलीवुड सितारों की मौजूदगी ने आयोजन को और भी खास बना दिया। सुरक्षा से लेकर व्यवस्थाओं तक हर इंतजाम किसी बड़े राष्ट्रीय आयोजन की तरह किया गया था। होटल परिसर में जगह-जगह सुरक्षा कर्मी तैनात दिखे और मेहमानों के स्वागत में कोई कमी नहीं छोड़ी गई।

सरलता और मुस्कान ने बनाया विवाह को यादगार
शादी के दौरान इंद्रेश उपाध्याय की वही सादगी और विनम्रता देखने को मिली, जिसके लिए वे पूरे देश में जाने जाते हैं। वृंदावन के कथावाचक होने के नाते उनकी छवि आध्यात्मिक और सहज व्यक्तित्व की रही है, और विवाह के दौरान भी वही भाव पूरे माहौल में झलकता रहा। रिश्तेदारों का कहना है कि वे बचपन से ही धार्मिक वातावरण में पले-बढ़े हैं और कथा वाचन उनकी आत्मा का हिस्सा बन चुका है। वहीं हरियाणा से आईं शिप्रा की सादगी, उनकी मुस्कान और शालीनता ने भी सभी का दिल जीत लिया। वरमाला के दौरान दोनों की मुस्कुराहट ने पूरे पंडाल में खुशियों की लहर दौड़ा दी।

भक्ति, परंपरा और सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं की बाढ़
इस विवाह में भारतीय संस्कृति की खूबसूरत विविधता भी पूरे वैभव के साथ देखने को मिली। वृंदावन की भक्ति-रस से भरी परंपरा और राजस्थान-हरियाणा की रंगीन सांस्कृतिक छटा जब एक साथ नजर आई, तो आयोजन और भी खास हो गया। दोनों परिवारों ने मिठाइयां खिलाकर एक-दूसरे का स्वागत किया और नए रिश्ते की शुरुआत को मंगलमय बनाया। शादी के बाद सोशल मीडिया पर भी इंद्रेश उपाध्याय और शिप्रा को बधाइयों का तांता लग गया। भक्तों और कथा-श्रोताओं ने दंपती के सुखद वैवाहिक जीवन के लिए ईश्वर से मंगलकामनाएं कीं।

तीन घंटे की वैदिक रस्में और तिरुपति बालाजी जैसा मंडप
वैदिक परंपराओं के अनुसार निभाई गई मुख्य शादी की रस्में करीब तीन घंटे तक चलीं। विवाह मंडप को तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर सजाया गया था, जो देखते ही बनता था। अग्नि के फेरे के समय धीरेंद्र शास्त्री, देवी चित्रलेखा, भागवत प्रभु समेत कई साधु-संत और सेलिब्रिटीज मंडप के आसपास मौजूद रहे। इससे पहले जयपुर एयरपोर्ट पर कुमार विश्वास और धीरेंद्र शास्त्री के साथ दूल्हा-दुल्हन का एक साथ पहुंचना भी खूब चर्चा में रहा।

101 पंडितों के बीच सात फेरों की पवित्र रस्म
होटल के जयगढ़ लॉन में हुए मुख्य समारोह में हरिद्वार, नासिक और वृंदावन से आए 101 पंडितों ने विधि-विधान से विवाह संपन्न कराया। सुबह लगभग 11:15 बजे इंद्रेश उपाध्याय मंडप पहुंचे और उन्होंने सभी पंडितों से आशीर्वाद लिया। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे शिप्रा गोल्डन रंग की साड़ी में मंडप में पहुंचीं। इंद्रेश उपाध्याय हाथ में चांदी की छड़ी लिए सभी वैवाहिक रस्में निभाते नजर आए। हर पल भक्तिभाव और परंपरा के रंग में रंगा हुआ था।