ED की बड़ी कार्रवाई: Al-Falah University के फाउंडर जावेद अहमद सिद्दीकी मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार, 19 ठिकानों पर छापे

ED ने Al-Falah University के फाउंडर जावेद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया। 19 ठिकानों पर छापे में कैश, दस्तावेज़ और शेल कंपनियों के सबूत मिले।

ED की बड़ी कार्रवाई: Al-Falah University के फाउंडर जावेद अहमद सिद्दीकी मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार, 19 ठिकानों पर छापे

अल फलाह यूनिवर्सिटी के फाउंडर और अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी धनशोधन रोकथाम कानून (PMLA) की धारा 19 के तहत की गई है, जिसमें ED को सीधे हिरासत का अधिकार प्राप्त है। गिरफ्तारी के बाद उनका मेडिकल कराया गया और फिर उन्हें साकेत कोर्ट में पेश किया गया।

छापेमारी में मिला बड़ा सुराग
ED की यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई। दिल्ली, हरियाणा और NCR से जुड़े 19 ठिकानों पर छापेमारी के दौरान एजेंसी को ऐसे कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और करीब 48 लाख रुपये से अधिक नकद मिले थे जो मामले को गंभीर बनाते हैं। साथ ही कई शेल कंपनियों के भी सबूत सामने आए, जिनका इस्तेमाल पैसों की आवाजाही को छुपाने के लिए किया गया था।

NAAC और UGC मान्यता में गड़बड़ी
जांच की शुरुआत उन दो FIR से हुई जो दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में दर्ज थीं। आरोप था कि फरीदाबाद स्थित Al-Falah University ने NAAC से मान्यता होने का झूठा दावा किया था।

यही नहीं, विश्वविद्यालय ने खुद को UGC के सेक्शन 12(B) के तहत मान्यता प्राप्त बताया था, जबकि UGC ने साफ कर दिया कि यूनिवर्सिटी केवल सेक्शन 2(f) के तहत एक स्टेट प्राइवेट यूनिवर्सिटी है और उसने कभी भी 12(B) मान्यता के लिए आवेदन तक नहीं किया।

ED का दावा — “ट्रस्ट पर पूरा नियंत्रण जावेद सिद्दीकी का”
एजेंसी के मुताबिक जावेद सिद्दीकी ही Al-Falah Charitable Trust और उससे जुड़े सभी वित्तीय फैसलों को नियंत्रित करते हैं। ट्रस्ट के नाम पर हुए खर्चों, फंडिंग और अकाउंट मूवमेंट में कई संदिग्ध लेनदेन पाए गए।

ED के अनुसार, उनके द्वारा अपराध से अर्जित पैसों को छिपाने और “लेयरिंग” करने की कोशिश की गई, जिसके चलते मनी लॉन्ड्रिंग का केस मजबूत हुआ।

ट्रस्ट का विस्तार और संदिग्ध वित्तीय क्षमता
Al-Falah Charitable Trust की स्थापना 8 सितंबर 1995 में हुई थी और शुरुआत से ही जावेद सिद्दीकी इसकी कमान संभाल रहे हैं। 1990 के दशक के बाद इस ट्रस्ट और इससे जुड़े कॉलेजों-यूनिवर्सिटी का तेजी से विस्तार हुआ, लेकिन ED के मुताबिक इसकी वित्तीय क्षमता उतनी मजबूत नहीं थी कि इतनी तेजी से विकास संभव हो सके। यही असमानता जांच का मुख्य आधार बनी, जिसके बाद एजेंसी ने कई दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की।