केवल मुस्लिमों के लिए बनेगी रिहायशी सोसाइटी? मीरा रोड पर बन रही ‘Halal Lifestyle Township’ ने खड़ा किया बवाल

महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद – मीरा रोड पर बन रही Halal Lifestyle Township केवल मुस्लिमों के लिए बताए जाने पर बवाल। प्रियंक कानूनगो ने लगाया आरोप – Nation Within The Nation”। जानिए पूरा मामला।

केवल मुस्लिमों के लिए बनेगी रिहायशी सोसाइटी? मीरा रोड पर बन रही ‘Halal Lifestyle Township’ ने खड़ा किया बवाल
प्रतीकात्मक तस्वीर

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। इस बार विवाद किसी नेता या पार्टी को लेकर नहीं, बल्कि एक हाउसिंग प्रोजेक्ट को लेकर खड़ा हुआ है। मुंबई से सटे मीरा रोड (Mira Road) में एक प्रोजेक्ट OASIS Township शुरू हुआ है, जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि यहां देश की सबसे बड़ी रिहायशी बिल्डिंग बनाई जाएगी।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह बिल्डिंग कथित तौर पर केवल मुस्लिम समुदाय (Muslim Community) के लिए बनाई जा रही है। यानी इस प्रोजेक्ट में वही लोग फ्लैट खरीद पाएंगे जो इस्लाम धर्म को मानते हैं। इस टाउनशिप का नाम रखा गया है – ‘Halal Lifestyle Township’।

विज्ञापन बना विवाद की जड़
इस प्रोजेक्ट का विज्ञापन सामने आने के बाद बवाल और बढ़ गया है। विज्ञापन में दिखाया गया है कि एक मुस्लिम परिवार नमाज पढ़ रहा है। इसके साथ ही QIBLA Facing View का ज़िक्र किया गया है।

क़िबला (Qibla) दरअसल अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है दिशा। यह उस ओर संकेत करता है जिस दिशा में पूरी दुनिया के मुसलमान अपनी नमाज़ (Salat) के दौरान मुख करते हैं – यानी सऊदी अरब के मक्का (Mecca) स्थित काबा (Kaaba) की ओर।

स्पष्ट है कि बिल्डर का टारगेट ऑडियंस मुस्लिम समुदाय है और वह इसी आधार पर फ्लैट खरीदने वालों को आकर्षित कर रहा है।

प्रियंक कानूनगो का आरोप: 'यह Nation within the Nation'

इस मामले पर प्रियंक कानूनगो ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि – यह कोई साधारण विज्ञापन नहीं बल्कि ‘विष व्यापन’ है। मुंबई के पास करजत इलाके में केवल मुसलमानों के लिए ‘हलाल लाइफस्टाइल’ वाली टाउनशिप बनाई जा रही है। यह Nation Within The Nation है। इसको लेकर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस भेजा जाएगा।

क्यों है यह मुद्दा बड़ा?
महाराष्ट्र की राजनीति में यह प्रोजेक्ट अब धर्म और सियासत का बड़ा विषय बन चुका है। यदि यह टाउनशिप केवल एक धर्म विशेष के लिए बनाई जाती है, तो इसे लेकर संवैधानिक और कानूनी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। विपक्ष इस मुद्दे को हाथ में लेकर सत्ता पक्ष को घेर सकता है। राज्य की सरकार पर सवाल है कि क्या उसने इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी है या फिर यह केवल निजी डेवलपर का निर्णय है।