राज ठाकरे की चेतावनी: 'नाटक करे तो बजाओ थप्पड़, लेकिन वीडियो मत बनाओ'
महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव: दो दशक बाद उद्धव और राज ठाकरे एक मंच पर आए। मराठी एकता पर जोर, हिंदी थोपने पर दी चेतावनी।
महाराष्ट्र की राजनीति में 5 जुलाई का दिन बड़ा मोड़ लेकर आया। दो दशकों के लंबे राजनीतिक और पारिवारिक मतभेद के बाद आखिरकार ठाकरे परिवार एकजुट हो गया। शनिवार को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पहली बार एक साथ मंच पर नजर आए। यह दृश्य महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बेहद भावुक और ऐतिहासिक रहा।
'बेवजह किसी को मत मारो, लेकिन…', राज ठाकरे की नसीहत
राज ठाकरे ने अपने जोशीले अंदाज में कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा — कल मीरा रोड में एक व्यापारी की हत्या कर दी गई। क्या उसके माथे पर लिखा था कि वह गुजराती है? ऐसा मत करो। हमें कुछ नहीं करना है। उस आदमी को मराठी बोलना चाहिए। बेवजह किसी को मत मारो, लेकिन अगर कोई जरूरत से ज्यादा नाटक करे तो उसके कान के नीचे बजाओ। और हां, अगली बार जब किसी को पीटो, तो उसका वीडियो मत निकालो।
हिंदी थोपने पर नाराजगी, मराठी की एकजुटता पर जोर
हिंदी भाषियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, हिंदी भाषी राज्यों से लोग रोजगार के लिए यहां आते हैं और हमें कहते हैं कि हिंदी सीखो। जब मराठा साम्राज्य पूरे देश में था, तब हमने मराठी किसी पर थोपी क्या? हिंदी तो सिर्फ 200 साल पुरानी भाषा है। इसे थोपकर देखना चाहते हैं कि मुंबई को महाराष्ट्र से अलग किया जा सकता है या नहीं। हम चुप हैं, इसका मतलब यह नहीं कि हम मूर्ख हैं। किस-किस के बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं, इसकी लिस्ट हमारे पास है।
'अंग्रेजी मीडियम पढ़ने वाले भी मराठी और हिंदुत्व के लिए खड़े हैं'
राज ने मराठी और हिंदुत्व की राजनीति पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए कहा, देवेंद्र फडणवीस अंग्रेजी मीडियम में पढ़कर मुख्यमंत्री बने। मेरे पिता और बालासाहेब ठाकरे अंग्रेजी मीडियम के थे। क्या उनके मराठी योगदान या हिंदुत्व पर शक करोगे? जयललिता, स्टालिन, उदयनिधि, पवन कल्याण, कमल हासन, विक्रम, सूर्या और एआर रहमान – ये सब अंग्रेजी मीडियम से पढ़े हुए हैं। तो क्या इनका देश और भाषा से प्यार कम है?
'सेना जैसी एकता चाहिए'
राज ठाकरे ने उदाहरण देते हुए कहा, भारतीय सेना में राजपूत रेजिमेंट, सिख लाइट इंफैंट्री, बिहार रेजिमेंट, महार रेजिमेंट, गोरखा राइफल्स जैसी कई यूनिट्स हैं। लेकिन जब दुश्मन पर हमला करना होता है, तो सब एक हो जाते हैं। क्या वहां कोई भाषा आड़े आती है? इसी तरह अब ये लोग हमें जाति और भाषा के नाम पर बांटने की कोशिश करेंगे। हमें एकजुट रहना होगा। कोई हमारे बीच दरार नहीं डाल सकता।
ठाकरे परिवार का एक होना न सिर्फ उनकी राजनीति के लिए, बल्कि महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरणों के लिए बड़ा संकेत है। यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में मराठी अस्मिता और क्षेत्रीय एकजुटता पर राजनीति और तेज़ होगी।


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