मालेगांव ब्लास्ट केस में बड़ा फैसला: साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित समेत सभी 7 आरोपी बरी, NIA कोर्ट ने कहा— सबूत नहीं मिले
मालेगांव ब्लास्ट केस में 17 साल बाद बड़ा फैसला आया है। NIA कोर्ट ने 7 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। जानिए पूरी रिपोर्ट और कोर्ट के फैसले की वजहें।
मालेगांव ब्लास्ट केस में बड़ा न्यायिक मोड़ आया है। NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की विशेष अदालत ने 31 जुलाई 2025 को सुनाए गए अपने फैसले में कहा कि 2006 के विस्फोट मामले में गिरफ्तार किए गए सभी 7 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि RDX कहां से आया, किसने बम रखा और साजिश किसने रची — इन सभी पहलुओं पर जांच में कोई निर्णायक प्रमाण नहीं मिला, जिसके चलते सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।
8 सितंबर 2006 को महाराष्ट्र के मालेगांव शहर में स्थित कब्रिस्तान के पास जुमे की नमाज़ के बाद श्रृंखलाबद्ध बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 37 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। धमाकों के बाद देशभर में सनसनी फैल गई थी।
कोर्ट के अनुसार क्या नहीं हो पाया साबित?
- RDX कहां से आया और किसने मालेगांव लाया – सबूत नहीं।
- विस्फोटक किसने रखा – कोई चश्मदीद नहीं।
- आरोपियों की घटनास्थल पर मौजूदगी – तकनीकी साक्ष्य नहीं।
इन 7 आरोपियों को किया गया बरी
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर (बीजेपी की पूर्व सांसद) लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, सुनील जोशी (मृतक), रमेश उपाध्याय, सुधाकर द्विवेदी, अजय राहिरकर, समीर कुलकर्णी, सुधाकर चतुर्वेदी।
मुआवज़ा भी देने का आदेश
कोर्ट ने इस फैसले के साथ-साथ पीड़ितों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए आदेश दिया है कि मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख की सहायता राशि दी जाए।


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