नेपाल संकट: सेना ने संभाली कमान, अब तक 22 की मौत और 400 से ज्यादा घायल; क्या बनेगी अंतरिम सरकार?

नेपाल में सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है। 22 लोगों की मौत और 400 से ज्यादा घायल हुए। सेना ने सत्ता संभाल ली है। बालेन शाह और रबी लामिछाने जैसे युवा नेता अंतरिम सरकार के संभावित चेहरे बनकर उभर रहे हैं।

नेपाल संकट: सेना ने संभाली कमान, अब तक 22 की मौत और 400 से ज्यादा घायल; क्या बनेगी अंतरिम सरकार?

नेपाल इस समय गंभीर राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ भड़का आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी है। राजधानी काठमांडू और आसपास के इलाकों में भड़की हिंसा में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 400 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। हालात बेकाबू होने पर मंगलवार रात 10 बजे से नेपाली सेना ने देश की बागडोर अपने हाथ में ले ली।

संसद भंग और नए चुनाव की मांग तेज
सेना के नियंत्रण में आने के बाद नेपाल का राजनीतिक भविष्य सवालों के घेरे में है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि संसद भंग कर नए चुनाव कराए जाएं। इसी बीच चर्चा यह भी है कि नेपाल की बागडोर किसके हाथ में जाएगी – सेना, कोई नई अंतरिम सरकार या फिर राजशाही?

सेना सिर्फ सुरक्षा नहीं, राजनीति में भी सक्रिय
सेना प्रमुख जनरल अशोक राज ने साफ संकेत दिए हैं कि सेना सिर्फ सुरक्षा संभालने तक सीमित नहीं रहेगी। सूत्रों का कहना है कि सेना और युवाओं के बीच अंतरिम सरकार के फॉर्मूले पर बातचीत चल रही है। इस सरकार में भ्रष्टाचार-मुक्त और युवाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले चेहरों को शामिल करने की संभावना जताई जा रही है।

बालेन शाह: युवाओं की पहली पसंद
काठमांडू के मेयर बालेन शाह आंदोलन में युवाओं के बीच सबसे लोकप्रिय चेहरा बनकर उभरे हैं। उन्हें “साफ-सुथरी राजनीति का प्रतीक” माना जा रहा है। खबर है कि उन्हें अंतरिम सरकार का प्रधानमंत्री बनाने पर चर्चा हो रही है।

रबी लामिछाने: जेन-ज़ी का दूसरा नेता
पूर्व पत्रकार और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के संस्थापक रबी लामिछाने भी युवाओं का मजबूत समर्थन हासिल कर रहे हैं। 2022 में पार्टी गठन के बाद से ही उन्होंने भ्रष्टाचार और पुरानी राजनीति के खिलाफ आवाज उठाई। उनकी पार्टी के 21 सांसदों ने एकसाथ इस्तीफा देकर पीएम ओली पर दबाव बनाया था। यह कदम उन्हें युवा आंदोलन का दूसरा बड़ा नेता बना रहा है।

राजशाही की वापसी की मांग भी तेज
इस उथल-पुथल में राजशाही समर्थक गुट भी सक्रिय हो गए हैं। उनका तर्क है कि लोकतंत्र ने देश को स्थिरता नहीं दी, इसलिए कॉनस्टिट्यूशनल मोनार्की (संवैधानिक राजशाही) की वापसी पर विचार होना चाहिए। आंदोलन के शुरुआती दिनों से ही यह चर्चा तेज थी और अब यह गुट फिर से जमीन पकड़ रहा है।

शेखर कोइराला: मुख्यधारा राजनीति का संतुलन
मुख्यधारा के नेताओं में अगर किसी को आंशिक रूप से युवाओं का समर्थन मिला है तो वह हैं नेपाली कांग्रेस के शेखर कोइराला। माना जा रहा है कि अंतरिम सरकार में उन्हें या उनके प्रतिनिधि को जगह देकर राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश होगी, ताकि पुरानी और नई राजनीति के बीच सेतु बनाया जा सके।