Nepal Jailbreak: 15,000 कैदी जेल तोड़कर भागे, 12,500 का अब तक कोई सुराग नहीं
नेपाल में युवाओं के आंदोलन के दौरान मची हिंसा में 15,000 से ज्यादा कैदी जेल तोड़कर फरार हो गए। करीब 12,500 कैदी अब भी खुले घूम रहे हैं। भारत-नेपाल बॉर्डर पर SSB ने अलर्ट जारी कर 60 संदिग्धों को पकड़ा है। काठमांडू में हालात सामान्य करने की कोशिश जारी है, जबकि सेना और पुलिस संयुक्त रूप से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं।
नेपाल में युवाओं के नेतृत्व में भड़के आंदोलन ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। भ्रष्टाचार और सरकार के सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे हिंसक हो गए। अब भले ही आंदोलन फिलहाल शांत होता दिख रहा है, लेकिन इसके बाद नेपाल अपनी हाल की सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती से जूझ रहा है।
15 हज़ार से ज्यादा कैदी जेल तोड़कर भागे
हिंसक प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस थानों और चौकियों को निशाना बनाया। इसी बीच कैदियों ने भी कई जेलों में बगावत कर दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश की 24 से ज्यादा जेलों से 15,000 कैदी भाग निकले। पुलिस का दावा है कि कुछ को पकड़ लिया गया है, लेकिन अभी भी करीब 12,500 कैदी फरार हैं।
India-Nepal Border पर SSB का सख्त पहरा
भारत-नेपाल की 1,751 किलोमीटर लंबी सीमा पर सख्त अलर्ट जारी कर दिया गया है। सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने सभी बॉर्डर पॉइंट्स पर सख्त जांच शुरू कर दी है।
पहचान पत्र के बिना किसी को पार नहीं करने दिया जा रहा।
पिछले दो दिनों में SSB ने उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से लगभग 60 संदिग्धों को पकड़ा है। पकड़े गए लोग ज्यादातर नेपाली कैदी बताए जा रहे हैं। करीब 60,000 जवान बॉर्डर पर तैनात कर दिए गए हैं और नेपाल की आर्म्ड पुलिस फोर्स के साथ मिलकर संयुक्त गश्त की जा रही है।
काठमांडू में हालात सामान्य करने की कोशिश
हिंसक प्रदर्शनों में राजधानी काठमांडू घाटी में कई पुलिस थाने और चौकियां जला दी गई थीं। अब स्थानीय लोग खुद आगे बढ़कर पुलिस के साथ मिलकर इन्हें फिर से खड़ा करने में मदद कर रहे हैं।
हिंसा के दौरान सेना की बैरकों में शरण लेने वाले पुलिसकर्मी अब ड्यूटी पर लौट आए हैं। सेना ने पूरे देश में फ्लैग मार्च किया है ताकि आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा कायम रहे।
नेपाल सरकार की सबसे बड़ी चुनौती
नेपाल सरकार और पुलिस का कहना है कि उनकी प्राथमिकता है जल्द से जल्द कानून-व्यवस्था बहाल करना और फरार कैदियों को पकड़ना। फिलहाल हालात काबू में आते जरूर दिख रहे हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक लंबी लड़ाई साबित हो सकती है।


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